यह ख़बर 22 जुलाई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

पर्यावरण मंजूरी में देरी से उत्पादन पर असर : कोल इंडिया

खास बातें

  • कोल इंडिया ने कहा है कि खनन प्रस्तावों को पर्यावरण मंजूरी मिलने में अत्यधिक विलंब से 67 नई परियोजनाओं पर निवेश फैसला रुका हुआ है।
New Delhi:

कोल इंडिया ने कहा है कि खनन प्रस्तावों को पर्यावरण मंजूरी मिलने में अत्यधिक विलंब से 67 नई परियोजनाओं पर निवेश फैसला रुका हुआ है। साथ ही जारी परियोजनाओं का विस्तार कार्य भी प्रभावित हो रहा है। इसके कारण सालाना 20 करोड़ टन उत्पादन का नुकसान हो रहा है। कोल इंडिया के चेयरमैन एनसी झा ने कहा कि केंद्र और राज्य स्तरों पर पर्यावरण एवं वन मंजूरी नहीं मिलने से हमारी 168 परियोजनाएं लंबित हैं, जिसमें से 67 परियोजनाएं नई हैं और हम इसमें कोई निवेश नहीं कर पा रहे हैं। शेष परियोजनाएं विस्तार योजनाओं से जुड़ी है, जो रुकी पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि इस देरी के कारण सालाना 20 करोड़ टन कोयला उत्पाद प्रभावित हो रहा है। निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत वन मंजूरी 300 दिनों के भीतर मिल जानी चाहिए। हालांकि, कंपनी के आकलन के अनुसार कुछ मामलों में छह साल तक का समय लग रहा है। झा ने कहा कि सैद्धांतिक मंजूरी में जहां छह साल तक का वक्त लग रहा है, वहीं अंतिम मंजूरी में भी इतना ही समय लगता है। उन्होंने कहा, हमने सरकार से मंजूरी पर जल्द निर्णय करने का अनुरोध किया, ताकि हम परियोजनाओं पर कदम आगे बढ़ा सकें और साथ ही अगर कुछ क्षेत्रों में खनन की इजाजत नहीं मिलती है, तो हम उसके मुताबिक अपने भंडार का अनुमान लगा सकें। सीआईएल की कुल 114 परियोजनाओं को पहले चरण की मंजूरी (सैद्धांतिक मंजूरी) का इंतजार है। इसमें से 92 परियोजनाएं को राज्य स्तर पर पर्यावरण मंजूरी का इंतजार है, वहीं शेष को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से मंजूरी मिलने की प्रतीक्षा है। जहां तक स्टेज-2 मंजूरी (अंतिम मंजूरी) का सवाल है, 54 परियोजनाएं अटकी हैं। इसमें से 31 परियोजनाएं राज्य स्तर पर लंबित हैं। देश के कुल घरेलू कोयला उत्पादन में 82 प्रतिशत योगदान कोल इंडिया का है। कंपनी ने पिछले वित्तवर्ष में 43.1 करोड़ टन कोयला का उत्पादन किया था। चालू वित्तवर्ष के लिए 45.2 करोड़ टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।


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