खास बातें
- फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने तथा जिंसों की ऊंची कीमत के कारण चालू वित्तवर्ष के दौरान मुद्रास्फीति ऊंची बनी रह सकती है।
New Delhi: कृषि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने तथा जिंसों की अपेक्षाकृत ऊंची कीमत के कारण चालू वित्तवर्ष के दौरान सकल मुद्रास्फीति ऊंची बनी रह सकती है और मार्च, 2012 में इसके 8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वैश्विक बैंकिंग और शोध कंपनी सिटी ग्रुप ने यह अनुमान लगाया है। मार्च, 2012 के लिए 8 प्रतिशत मुद्रास्फीति रहने का अनुमान सरकार के 6-7 प्रतिशत के अनुमान से अधिक है। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी पूर्व में वित्तवर्ष के अंत तक सकल मुद्रास्फीति के 6 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान जताया है। सिटी इंडिया ने इंडिया मैक्रो फ्लैश शीषर्क से जारी रिपोर्ट में कहा है, हमारा अनुमान है कि सकल मुद्रास्फीति वित्तवर्ष 2011-12 के दौरान औसतन 9 से 9.5 प्रतिशत रहेगी और मार्च में इसके 8 प्रतिशत पर आने का अनुमान है। यह रिजर्व बैंक के 6 प्रतिशत के अनुमान से कहीं अधिक है। उल्लेखनीय है कि जून महीने में थोक मूल्य सूचकांक आधारित सकल मुद्रास्फीति 9.44 प्रतिशत थी, जो मई में 9.06 प्रतिशत थी। रिपोर्ट के मुताबिक कीमत ऊंची बने रहने का एक प्रमुख कारण कृषि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि है। हालांकि जिंसों की कीमतें थोड़ी नरम हुई हैं, लेकिन यह तुलनात्मक रूप से ऊंची है। सरकार ने पिछले महीने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य मौजूदा खरीफ सत्र के लिए 80 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा दिया था। इसके अलावा दलहन, तिलहन और कपास के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की गई है।