खास बातें
- भारतीय उद्योग जगत का भरोसा अप्रैल-जून के दौरान मुद्रास्फीति की ऊंची दर और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में और वृद्धि से डगमगा रहा है।
New Delhi: भारतीय उद्योग जगत का भरोसा अप्रैल-जून के दौरान मुद्रास्फीति की ऊंची दर और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में और वृद्धि से डगमगा रहा है। यह बात एक सर्वेक्षण में कही गई है। सीआईआई के तिमाही कारोबार परिदृश्य सर्वेक्षण में कहा गया है कि अप्रैल-जून, 2011 के दौरान कारोबारी विश्वास सूचकांक पिछले तिमाही के 66.7 से कम होकर 62.5 पर आ गया। इसमें कहा गया है कि कच्चे माल की ऊंची लागत, बुनियादी ढांचे का अभाव और उच्च ब्याज दर तीन प्रमुख कारोबारी चिंताएं हैं। इसमें कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमतों में अनिश्चितता, मौद्रिक नीति में और सख्ती तथा उच्च मुद्रास्फीति से उद्योग जगत का भरोसा डगमगा रहा है। अप्रैल में कुल मुद्रास्फीति 8.66 प्रतिशत पर थी। जनवरी, 2010 से ही महंगाई की दर 8 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है। रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने के लिए पिछले वर्ष मार्च से अब तक नौ बार नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय बैंक जून में होने वाले मध्य तिमाही समीक्षा के दौरान नीतिगत दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। सर्वेक्षण में शामिल 300 कंपनियों में से अधिकांश कंपनियों ने पिछले तिमाही के मुकाबले अप्रैल-जून के दौरान क्षमता विस्तार पर खर्च में बढ़ोतरी की बात कही। सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों ने कहा कि उपभोक्ता मांग में कमी आने की संभावना है। 33 प्रतिशत लोगों ने कहा कि चालू वित्तवर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 8 से 8.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। वहीं 50 प्रतिशत लोगों ने आशंका जताई कि 2011-12 के दौरान मुद्रास्फीति 8 प्रतिशत से ऊपर रहेगी।