यह ख़बर 12 फ़रवरी, 2011 को प्रकाशित हुई थी

9 फीसदी रह सकती है आर्थिक वृद्धि : चिदंबरम

खास बातें

  • चिदंबरम ने 9% वृद्धि दर हासिल होने की उम्मीद व्यक्त करते हुए कहा कि मंदी में भारत और चीन ही दो बड़े राष्ट्र रहे, जो उच्च आर्थिक वृद्धि हासिल करते रहे।
तिरुवनंतपुरम:

गृहमंत्री पी चिदंबरम ने चालू वित्तवर्ष में 9 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि दर हासिल होने की उम्मीद व्यक्त करते हुए कहा कि वैश्विक आर्थिक मंदी के दौर में भारत और चीन ही दो बड़े राष्ट्र रहे, जो लगातार उच्च आर्थिक वृद्धि हासिल करते रहे। राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज द्वारा प्रायोजित और केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित चार दिवसीय विकास सम्मेलन को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा, अमेरिका में पुराने बैंक ताश के पत्तों से बने घर की तरह गिर पड़े, यूरोप में भी कई बैंक ध्वस्त हो गए। कई देशों में आर्थिक वृद्धि नकारात्मक हो गई। लेकिन बड़े देशों में चीन और भारत ही ऐसे रहे, जिनमें इस दौरान आर्थिक वृद्धि शून्य से नीचे नहीं गई, बल्कि अच्छी वृद्धि का रुख बना रहा। उन्होंने कहा कि आर्थिक संकट के दौर में भी भारत की आर्थिक वृद्धि अच्छी बनी रही। 2004 से लेकर 2008 के बीच भारत की औसत वृद्धि दर 8.5 प्रतिशत रही। वैश्विक वित्तीय संकट के दौर में भी भारत की आर्थिक वृद्धि 6.7 प्रतिशत रही। जहां एक तरफ अमेरिका में इस दौरान 1,000 से अधिक बैंक ध्वस्त हो गए, भारत में एक भी बैंक अथवा वित्तीय संस्थान संकट में नहीं फंसा। 2009-10 में भारतीय अर्थव्यवस्था 8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। मुझे इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा अगर इस साल यह 9 प्रतिशत की दर से बढ़ती है। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) ने इस साल 8.6 प्रतिशत वृद्धि का अग्रिम अनुमान जारी किया है। रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार 8.5 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि के अनुमान पर टिके हैं। पूर्व वित्तमंत्री चिदंबरम ने कहा कि दुनिया के कई विकसित देश इस दौरान आर्थिक मंदी के शिकार हो गए। आइसलैंड जैसे यूरोप के कई देश दिवालिया हो गए। स्पेन और आयरलैंड दिवालिया होने की कगार तक पहुंच गए। अमेरिका, फ्रांस, रूस और जापान जैसे विकसित देशों में नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। यहां तक कि सिंगापुर में भी एक साल नकारात्मक वृद्धि रही। चिदंबरम ने कहा कि देश के आर्थिक विकास में निजी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। निजी क्षेत्र के गतिशील रहने से सार्वजनिक क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। इनकी बदौलत देश में ढांचागत सुविधाओं, सॉफ्टवेयर, इस्पात, खनन और धातुओं के क्षेत्र में काफी वृद्धि देखने को मिली है। प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री वायलर रवि ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने प्रवासी केरलवासियों से कहा कि वह राज्य में निवेश बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की परियोजनाओं में राज्य के प्रवासियों को निवेश के ज्यादा अवसर दिए जाने चाहिए।


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