अरुण जेटली ने दूर की नीतीश की 'गलतफहमी', बोले- केंद्र के पैकेज से बिहार में होगी तरक्की

अरुण जेटली ने दूर की नीतीश की 'गलतफहमी', बोले- केंद्र के पैकेज से बिहार में होगी तरक्की

वित्तमंत्री अरुण जेटली की फाइल फोटो

नई दिल्ली:

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उस दावे को 'गलतफहमी' करार देते हुए खारिज किया, जिसमें नीतीश कुमार ने कहा था कि 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों से बिहार को केंद्र से मिलने वाला धन कम होगा। जेटली ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री के दावे के उलट अगले पांच साल के दौरान राज्य को कुल धन हस्तांतरण वास्तव में बढ़कर 4.08 लाख करोड़ रुपये पहुंच जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बिहार के लिए घोषित 1.25 लाख करोड़ रुपये के पैकेज से जमीनी स्तर पर ठोस काम दिखेंगे।

इस महीने की शुरुआत में बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा लिखे गए एक पत्र का बिंदुवार जवाब देते हुए जेटली ने कहा कि बिहार के लिए पैकेज की घोषणा राज्य के सर्वांगीण विकास और वहां के लोगों की बेहतरी के लिए केंद्र द्वारा दर्शाई गई एक अडिग प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

वहीं सूत्रों ने कहा कि जेटली ने कुमार को लिखे अपने पत्र में यह धारणा 'भ्रामक' करार दी है कि 2015-16 के बजट में बजटीय सहायता में कमी से केंद्रीय करों में हिस्सेदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। उनके मुताबिक, यह एक 'गलत धारणा' है कि 14वें वित्त आयोग की सिफारिशें और राज्यों को कोष में कमी से बिहार के लिए अतिरिक्त कोष प्रवाह में वृद्धि नहीं हुई है।

जेटली ने कहा, '14वें वित्त आयोग की सिफारिशों के मुताबिक, वर्ष 2015-20 के लिए राज्य को कुल हस्तांतरण 4,08,166 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो 13वें वित्त आयोग द्वारा 2010-15 के लिए अनुमानित 1,72,944 करोड़ रुपये के मुकाबले 136.01 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।'

इसके अलावा जेटली ने कहा कि बिहार देश में बड़े राज्यों की कतार में है, लेकिन विकास के मामले में यह काफी पिछड़ा है। पैकेज में परियोजनाएं ज्यादातर केंद्रय क्षेत्र की हैं और इसलिए इनका क्रियान्वयन सीधे संबद्ध केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा किया जाएगा। उन्होंने कहा,  'यह पैकेज बिहार और बिहार के लोगों की बेहतरी को ध्यान में रखकर उपलब्ध कराया गया है। प्रधानमंत्री द्वारा घोषित पैकेज से बिहार में भारत सरकार का खर्च बढ़ेगा और इससे जमीनी स्तर पर ठोस नतीजे सामने आएंगे।' विशेष पैकेज में विभिन्न मंत्रालयों द्वारा पहले से ही घोषित विभिन्न चालू योजनाएं व परियोजनाएं शामिल हैं, इन चिंताओं के संदर्भ में जेटली ने कहा कि विभिन्न कारणों के चलते इनमें से कुछ परियोजनाएं सिरे नहीं चढ़ सकीं।

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वहीं विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में एक अंतर-मंत्रालयी समूह ने मामले का विश्लेषण किया था और इसके खिलाफ निर्णय किया था।