SEBI ने तेजी से बढ़ती म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में गवर्नेंस ढांचे को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाएं हैं.
नई दिल्ली: BQ PRIME की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने सभी घरेलू म्यूचुअल फंड्स (Domestic Mutual Funds), उनकी ऐसेट मैनेजमेंट कंपनियों के ऑडिट करने की तैयारी में है. इसके लिए सेबी (SEBI) ने लिस्ट में शामिल ऑडिटर्स से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) मांगा है. आपको बता दें कि इससे पहले भी SEBI ने तेजी से बढ़ती म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में गवर्नेंस ढांचे को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाएं हैं. सेबी लगातार गवर्नेंस ढांचे को मजबूत करने की कोशिश में है. यह SEBI की तरफ से उठाए गए पिछले कदमों के हिस्से के रूप में हैं.
मार्केट रेगुलेटर ने पिछले हफ्ते ने म्यूचुअल फंड्स में ट्रस्टीज की भूमिका और जिम्मेदारियों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया था. इसके साथ ही एक डिस्कशन पेपर जारी किया था. SEBI ने अपने डिस्कशन पेपर में ट्रस्टीज की जिम्मेदारियों को लेकर अलग से साफ-साफ जिक्र करने की बात कही थी. इसमें SEBI ने कहा था कि कुछ जिम्मेदारियों को थर्ड पार्टी से आउटसोर्स किया जा सकता है.
एक घरेलू म्युचुअल फंड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि यह फैसला आखिर किन घटनाओं की वजह से लिया गया है. अधिकारी के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री (Mutual Fund Industry) में हुईं कुछ खास घटनाओं की वजह से इस तरह के कदम उठाए गए हैं. उन्होंने बताया कि इसमें पहला मामला फ्रैंकलिन टेम्पलटन (Franklin Templeton) का था. यह मामला एक शीर्ष अधिकारी की ओर से रेगुलेटर्स की चिंता फंड हाउस के डेट फंड्स के खत्म होने से पहले पैसे निकालने को लेकर थी. इसके साथ ही अधिकारी ने यह बताया है इसमें दूसरा मामला एक्सिस म्यूचुअल फंड (Axis Mutual Fund) फ्रंटरनिंग का है. इस मामले के दौरान पिछले साल एक्सिस म्यूचुअल फंड के दो फंड मैनेजर्स विरेश जोशी और दीपक अग्रवाल को फ्रंटरनिंग के आरोप में निकाला गया था.
इसके साथ ही अधिकारी ने बताया कि मार्केट रेगुलेटर रिटेल निवेशकों के हितों की रक्षा करने की कोशिश कर रहा है. इसके लिए SEBI बेहतर कंप्लायंस सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है. अधिकारी के मुताबिक, ऐसे में घरेलू म्यूचुअल फंड्स को चीफ विजिलेंस ऑफिसर को हायर करना चाहिए, हालांकि, यह अबतक सिर्फ बैंकों तक ही सीमित था.