यह ख़बर 13 जून, 2011 को प्रकाशित हुई थी

रिलायंस के लिए नियम तोड़े-मरोड़े गए : कैग

खास बातें

  • कैग ने कहा है कि पेट्रोलियम मंत्रालय और तेल क्षेत्र के नियामक डीजीएच ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए नियमों को तोड़ा-मरोड़ा है।
New Delhi:

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने कहा है कि पेट्रोलियम मंत्रालय और तेल क्षेत्र के नियामक डीजीएच ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए नियमों को तोड़ा-मरोड़ा है। हालांकि कैग ने यह निष्कर्ष नहीं निकाला है कि क्या मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली आरआईएल ने सरकार को जरूरत से अधिक खर्च दिखाकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया है या नहीं। केजी.डीडब्ल्यूएन.98-3 या केजी.डी6 ब्लॉक पर अपनी अंकेक्षण रपट में कैग ने कहा कि हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय ने रिलायंस को 18 गैस भंडारों में सबसे बड़े धीरूभाई.1 और 3 का विकास करने के लिए पूंजीगत खर्च 117 प्रतिशत तक बढ़ाने की अनुमति दी। कैग ने कहा, शुरुआती विकास योजना की लागत 2.39 अरब डॉलर बढ़ाकर 5.196 अरब डॉलर करने से भारत सरकार के वित्तीय राजस्व पर प्रभावी असर पड़ने की संभावना है। हालांकि, इस चरण में उपलब्ध कराई गई सूचना के आधार पर हम इस लागत वृद्धि को उचित करार देने या अन्यथा कहने की स्थिति में नहीं हैं। रिलायंस जैसे एक ऑपरेटर को तेल या गैस की बिक्री से हुई आय में से वह खर्च घटाने की अनुमति है जो उसने एक क्षेत्र के विकास पर खर्च किए हैं। कंपनी सरकार सहित अन्य भागीदारों के बीच लाभ बंटवारे से पहले यह खर्च घटाती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज पर गैस क्षेत्र की लागत बढ़ाकर दिखाने का आरोप लगने के बाद कैग को रिलायंस के खातों की जांच करने को कहा गया। कैग की रपट पेट्रोलियम मंत्रालय से टिप्पणी मिलने के बाद संसद में पेश की जाएगी। रपट में कहा गया है कि रिलायंस का इरादा कभी भी शुरुआती लागत के मुताबिक केजी.डी6 गैस क्षेत्र का विकास करने का नहीं रहा क्योंकि उसने मूल योजना के मुताबिक उपकरणों के लिए निविदा जारी करने की पहल नहीं की। रपट के मुताबिक, ज्यादातर खरीद संबंधी गतिविधियां काफी देर की हुईं, जो मई, 2004 के आईडीपी के नियमों के मुताबिक थी। इससे स्पष्ट प्रमाण मिलता है कि ऑपरेटर का इरादा इन समय सीमाओं का अनुपालन करने का नहीं था।


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