खास बातें
- सरकार गुरुवार को प्राकृतिक गैस की कीमत दोगुना कर 8.42 डॉलर प्रति इकाई करने के बारे में निर्णय कर सकती है। तीन साल में यह पहला मौका है जब इस मुद्दे पर विचार किया जाएगा। हालांकि इस कदम का पुरजोर विरोध किया जा रहा है क्योंकि इससे बिजली दरों तथा उर्वरक की लाग
नई दिल्ली: सरकार गुरुवार को प्राकृतिक गैस की कीमत दोगुना कर 8.42 डॉलर प्रति इकाई करने के बारे में निर्णय कर सकती है। तीन साल में यह पहला मौका है जब इस मुद्दे पर विचार किया जाएगा। हालांकि इस कदम का पुरजोर विरोध किया जा रहा है क्योंकि इससे बिजली दरों तथा उर्वरक की लागत बढ़ेगी।
पेट्रोलियम मंत्रालय का प्रस्ताव है कि देश में उत्पादित सभी प्राकृतिक गैस की कीमत का निर्धारण अंतरराष्ट्रीय बाजार तथा आयातित एलएनजी के औसत मूल्य फार्मूले के तहत हो। रंगराजन समिति ने यही सुझाव दिया है। यह मामला आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की कल होने वाली बैठक के एजेंडे में शामिल है।
सूत्रों ने कहा कि मूल्य व्यवस्था एक अप्रैल 2014 से प्रभाव में आएंगी। यह सार्वजनिक क्षेत्र की ओएनजीसी तथा निजी क्षेत्र की रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों द्वारा घरेलू क्षेत्र में उत्पादित गैस पर लागू होंगी। प्रस्ताव के अनुसार गैस कीमत 2017 तक प्रत्येक तिमाही में संशोधित होगी। ऐसा होने से 2017 तक दरें पूरी तरह मुक्त हो जाएंगी।
सीसीईए की कल की बैठक में अगर इसे मंजूरी मिलती है तो गैस की कीमत मौजूदा 4.2 डॉलर प्रति 10 लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) से बढ़कर 8.42 डॉलर एमएमबीटीयू हो जाएगी। यह दर मंत्रालय की दर से अधिक है। मंत्रालय मामले में विरोध को कम करने के इरादे से गैस कीमत 6.77 प्रति एमएमबीटीयू करने का प्रस्ताव किया था।
बहरहाल, बिजली तथा उर्वरक मंत्रालय इस कदम का पुरजोर विरोध कर रहे हैं क्योंकि इससे बिजली और रासयनिक उर्वरकों की उत्पादन लागते बढ़ जाएगी। इसका यूरिया सब्सिडी पर भी असर पड़ेगा। वाम दलों ने भी आरोप लगाया है कि पेट्रोलियम मंत्री एम वीरप्पा मोइली कीमत वृद्धि का प्रस्ताव कर के रिलायंस इंडस्ट्रीज की मदद की कोशिश कर रहे हैं।
कुछ सरकारी सूत्रों का कहना है कि सीसीईए पेट्रोलियम मंत्रालय के हर तीन महीने में कीमत की समीक्षा के प्रस्ताव को शायद स्वीकार नहीं करेगी।