यह ख़बर 06 फ़रवरी, 2014 को प्रकाशित हुई थी

एनटीपीसी की बिजली कटौती की धमकी पर बीएसईएस पहुंची सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली:

दिल्ली में बिजली वितरण का काम कर रही अनिल धीरूभाई अंबानी समूह की कंपनी ने एनटीपीसी के उस नोटिस को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है, जिसमें बकाया भुगतान न करने की स्थिति में बिजली आपूर्ति बंद करने की चेतावनी दी गई है।

मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को करेगी। याचिका की फौरन सुनवाई करने की अपील की गई है। बीएसईएस के वकील ने कहा कि इस मामले से जुड़ा एक मामले पर शुक्रवार को सुनवाई हो रही है, लिहाजा इस नई याचिका की भी सुनवाई भी उसके साथ ही की जाए। पीठ ने यह अनुरोध मान लिया।

एनटीपीसी ने पिछले सप्ताह बीएसईएस राजधानी और बीएसईएस यमुना को भुगतान सुरक्षा प्रणाली और बकाया राशि भुगतान न करने के मामले में नोटिस जारी किया था। बीएसईएस राजधानी और बीएसईएस यमुना ने 1 फरवरी को नोटिस जारी करेन के बाद, एनटीपीसी ने 4 फरवरी को कहा था कि वह संकट में है और यदि बकाये का भुगतान नहीं होता, तो कंपनी को इन वितरण कंपनियों को बिजली की आपूर्ति बंद करनी पड़ सकती है।

एनटीपीसी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक ने कहा था कि यदि समय पर भुगतान नहीं होता, तो उसे करीब 2,000 मेगावाट बिजली की आपूर्ति पर नियमानुसार कार्रवाई करनी पड़ सकती है। बीएसईएस राजधानी और यमुना के पास यह बकाया दिसंबर में हुई बिजली आपूर्ति से जुड़ा है, जिसका भुगतान जनवरी के आखिर में होना है। एनटीपीसी ने कहा था कि फिलहाल दोनों कंपनियों के लिए कोई ऋण पत्र उपलब्ध नहीं है।

बीएसईएस राजधानी का आखिरि ऋण-पत्र 31 जनवरी को भुना लिया गया था, उसके बाद कंपनी पर एनटीपीसी की बकाया राशि 271.61 करोड़ रुपये है। बीएसईएस यमुना के लिए बकाया राशि 96.07 करोड़ रुपये है। एनटीपीसी से बीएसईएस राजधानी को 1,261 मेगावाट और बीएसईएस यमुना को 811 मेगावाट बिजली मिलती है। बीएसईएस राजधानी दक्षिण एवं पश्चिम दिल्ली और बीएसईएस यमुना केंद्रीय एवं पूर्वी दिल्ली में बिजली वितरण करती हैं।


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