यह ख़बर 24 जुलाई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'भारत के युवा हैं ब्रांड के दीवाने'

खास बातें

  • भारत के युवा ब्रांडेड कपड़ों के दीवाने हैं। वे महंगे ब्रांड के कपड़ों पर हर महीने 2,500 रुपये से 5,000 रुपये तक खर्च कर डालते हैं।
नई दिल्ली:

भारत के युवा ब्रांडेड कपड़ों के दीवाने हैं। वे महंगे ब्रांड के कपड़ों पर हर महीने 2,500 रुपये से 5,000 रुपये तक खर्च कर डालते हैं। यह बात रविवार को जारी हुए एक सर्वेक्षण में सामने आई। 'एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया' (एसोचैम) द्वारा कराए गए इस सर्वेक्षण में देश के 10 शहरों में 13-21 वर्ष की उम्र के 2,000 युवाओं से बात-चीत कर निष्कर्ष निकाला गया। एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा, "फैशन के प्रति जागरूक किशोरवय लड़के और लड़कियां अपनी छवि को लेकर काफी चिंतित हो गए हैं और इसे पहले से कहीं अधिक गंभीरता से ले रहे हैं।" सर्वेक्षण में शामिल 35 फीसदी युवाओं ने माना कि वे एक महीने में औसतन 5,000 रुपये ब्रांडेड परिधानों पर खर्च करते हैं। करीब 40 फीसदी प्रतिभागियों ने बताया कि वे महीने में 4,000 रुपये ब्रांडेड कपड़ों पर खर्च करते हैं। करीब 400 उत्तरदाताओं ने कहा कि वे महीने में ब्रांडेड कपड़ों पर 3,500 से 4,000 रुपये व्यय करते हैं। बाकी ने कहा कि वे इन कपड़ों पर 2,500 रुपये तक खर्च करते हैं। रावत ने आगे कहा, "आज के युवा खुद को दूसरों से अलग पेश करना चाहते हैं और अपने भत्ते का एक बड़ा हिस्सा कपड़ों पर व्यय करते हैं।" अध्ययन में पाया गया कि युवाओं को स्पोर्टवीयर में 'नाइक' ब्रांड सबसे अधिक पसंद है। 'एडिडास' उनकी पसंद में दूसरे स्थान पर आता है, जबकि कुछ युवा रीबॉक, प्युमा, वुडलैंड और फिला ब्रांड के कपड़े भी पसंद करते हैं। अनौपचारिक परिधानों (कैजुअल वीयर) में लेविस सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला ब्रांड है। उसके बाद ली, रैंगलर, फ्लाइंग मशीन, पेप जींस लंदन, डीजल, स्पाइकर, के-लौंज और न्युमरो यूनो के जींस के परिधान पसंद किए जाते हैं।


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