यह ख़बर 07 जुलाई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

पूर्व दूरसंचार सचिव ने स्वान को पहुंचाया लाभ

खास बातें

  • 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में जेल में सजा काट रहे पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा ने आवेदकों की वरिष्ठता सूची में गड़बड़ी की थी।
नई दिल्ली:

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में जेल में सजा काट रहे पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा ने आवेदकों की वरिष्ठता सूची में गड़बड़ी की थी ताकि स्पेक्ट्रम के आवंटन में स्वान टेलीकॉम को लाभ पहुंचाया जा सके। सीबीआई के वरिष्ठ अधिवक्ता और विशेष अभियोजक यूयू ललित ने दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अजित भरिहोक को गुरुवार को यह जानकारी देते हुए कहा, इस मामले में बेहुरा की भूमिका और संलिप्तता एकदम साफ है क्योंकि उन्होंने अपात्र फर्म स्वान टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड के आवेदन को वैध करार दिया और इसे लाभ पहुंचाने के लिए आवेदकों की वरिष्ठता सूची को नजरअंदाज किया। ललित ने बेहुरा की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा, दिल्ली के आकर्षक सर्कल के लिए (स्पेक्ट्रम के आवंटन के लिए) केवल एक ही रिक्ति थी और अगर आरोपियों ने निष्पक्ष तरीके से काम किया होता तो स्वान को इसके लिए लाइसेंस नहीं मिल सकता था। ललित ने कहा, वरिष्ठता सूची में पांचवें स्थान पर रही स्वान टेलीकॉम दिल्ली सर्कल के लिए लाइसेंस नहीं ले सकती थी क्योंकि स्पाइस और टाटा उससे आगे थे। उन्होंने कहा, आरोपियों द्वारा सूची से कंपनियों को हटा दिए जाने के कारण सह-आरोपी शाहिद बलवा द्वारा प्रवर्तित स्वान टेलीकॉम को स्पेक्ट्रम मिल गया। उन्होंने कहा, पहले आओ, पहले पाओ नीति के कारण दूरसंचार विभाग के कार्यालय में भगदड़ मच गई जहां फर्म के प्रतिनिधियों की शारीरिक फिटनेस ने स्पेक्ट्रम के आवंटन का फैसला किया। ललित ने कहा, स्वान टेलीकॉम को यूएएस लाइसेंस जारी करने में दिखाई गई अवांछित जल्दबाजी और तत्कालीन सोलिसिटर जनरल द्वारा अनुमोदित किए जाने के बाद मसौदा प्रेस विज्ञप्ति के अंतिम वाक्य को जान बूझकर हटा दिए जाने से बेहुरा की इस मामले में संलिप्तता का साफ संकेत मिलता है।


Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com