यह ख़बर 09 अप्रैल, 2013 को प्रकाशित हुई थी

भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2013-14 में छह फीसदी होगी : एडीबी

खास बातें

  • एडीबी की एशियाई विकास दृष्टिकोण 2013 की रपट में कहा गया है कि भारत में सुधार की जरूरत है ताकि ढांचागत दिक्कतों, घटते निवेश और बढ़ते चालू खाते के घाटे के कारण वृद्धि में आई नरमी की स्थिति में बदलाव लाया जा सके।
नई दिल्ली:

बहुपक्षीय ऋणदाता एजेंसी एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने कहा कि वाह्य मांग में बढ़ोतरी और सुधार प्रक्रिया में प्रगति के मद्देजर भारत की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष के दौरान बढ़कर छह फीसदी तक हो सकती है।

एडीबी की एशियाई विकास दृष्टिकोण 2013 की रपट में कहा गया है कि भारत में सुधार की जरूरत है ताकि ढांचागत दिक्कतों, घटते निवेश और बढ़ते चालू खाते के घाटे के कारण वृद्धि में आई नरमी की स्थिति में बदलाव लाया जा सके।

मनीला स्थित इस एजेंसी ने कहा कि यदि मानसून खराब रहा, राजकोषीय पुनर्गठन व सुधार की दिशा में प्रति धीमी पड़ी और वैश्विक अर्थव्यवस्था में नरमी बरकरार रही तो वृद्धि उसके अनुमान से कम भी रह सकती है।

वित्त वर्ष 2012-13 में भारत की वृद्धि दर पांच फीसद रहने का अनुमान है, जो पिछले एक दशक का न्यूनतम स्तर होगा। पिछले वित्त वर्ष में सेवा क्षेत्र में नरमी, कम खपत, निर्यात में कमी और मानसून में देरी के कारण कृषि वृद्धि में कमी के कारण आर्थिक वृद्धि प्रभावित हुई।

एडीबी का यह भी अनुमान है कि वैश्विक परिदृश्य में सुधार और निर्यात में बढ़ोतरी की मदद से 2014-15 में भारत की वृद्धि 6.5 फीसदी तक हो जाएगी।

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भारत में एडीबी के निदेशक नरहरि राव ने कहा, आपूर्ति और नीति की दिक्कतों के कारण वृद्धि व निवेश में नरमी आई है और औद्योगिक उत्पादन गिरा है। उन्होंने कहा, नीतिनिर्माताओं को तेज वृद्धि के लिए ढांचागत बाधाएं दूर करने की जरूरत है और हाल में जहां कुछ उत्साहजनक सुधार हुए हैं वहीं कुछ और की जरूरत है। रपट में कहा गया कि अगले दो साल में कुछ और सुधार होने की उम्मीद है। बारिश सामान्य होने पर कृषि क्षेत्र में तेजी आएगी। इस दौरान घरेलू व वाह्य मांग बढ़ने से निर्यात, उद्योग व सेवा क्षेत्रों में कारोबार का विस्तार होने की की उम्मीद है।