यह ख़बर 23 अक्टूबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'राजा के मंत्री बनने पर शुरू हुई 2जी की साजिश'

खास बातें

  • कोर्ट ने कहा कि रिश्वत के बदले अयोग्य कंपनियों को 2जी स्पेक्ट्रम आवंटित करने की साजिश ए राजा के दूरसंचार मंत्री बनने के बाद शुरू हुई।
नई दिल्ली:

पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और द्रमुक सांसद कनिमोई सहित 16 अन्य के खिलाफ आरोप तय करने वाली दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को कहा कि रिश्वत के बदले अयोग्य दूरसंचार कंपनियों को 2जी स्पेक्ट्रम आवंटित करने की साजिश ए राजा के दूरसंचार और सूचना प्रोद्यौगिकी मंत्री बनने के बाद शुरू हुई। विशेष न्यायाधीश ओ पी सैनी ने साजिश नहीं होने की बचाव पक्ष की दलील को खारिज करते हुए कहा, आरोपी ए राजा के 16 मई को संचार और सूचना प्रोद्यौगिकी मंत्री बनने के बाद साजिश शुरू हुई और ट्राई की 28 अगस्त 2007 को दी गई सिफारिशों के बाद अगस्त-सितंबर 2007 में यह जाहिर होनी शुरू हो गई। न्यायाधीश ने कहा कि साजिश तब तक चली जब सात अगस्त 2009 को कलाइगनर टीवी को 50 करोड़ रूपये रिश्वत के तौर पर मिले। अदालत ने कहा कि मामले में आरोपी एक दूसरे को शुरू से जानते थे, साजिश शुरू होने के बहुत पहले से। अदालत ने कहा, आरोपी ए राजा द्रमुक से दूरसंचार मंत्री थे और मेसर्स कलाइगनर टीवी प्राइवेट लिमिटेड को कथित तौर पर इसके सहयोगी चला रहे थे। अदालत ने कहा, आरोप और दर्ज बयान प्रथम दृष्टया बताते हैं कि 200 करोड़ रूपये की राशि आरोपी ए राजा के रिश्वत के लिए थी जो यूनीफाइड एक्सेस सर्विसेज लाइसेंस (एकीकृत पहुंच सेवा लाइसेंस) के आवंटन और स्वान टेलीकॉम को स्पेक्ट्रम आवंटन के बदले दी जानी थी और आखिरकार कलइगनर टीवी को मिली। न्यायाधीश ने कहा, आरोपी व्यक्तियों का यह कहना रिकॉर्ड के उलट है कि आपराधिक साजिश होने का कोई सबूत नहीं है। अदालत ने बचाव पक्ष की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि सीबीआई द्वारा साजिश की अवधि का आरोपपत्र में जिक्र नहीं करने से आरोपियों के खिलाफ पूर्वाग्रह साबित होता है। यूएएस लाइसेंस और स्पेक्ट्रम के आवंटन के साथ ही मुख्य साजिश के खत्म हो जाने की दलीलों को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि रिश्वत दिया जाना दो आरोपी कंपनियों को यूएएस लाइसेंस और स्पेक्ट्रम दिए जाने का तार्किक अंत है और इन्हें अलग नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि अगर साजिश हुई भी होगी तो कई साजिशें हुई होंगी क्योंकि पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा एक जनवरी 2008 को दूरसंचार विभाग में नियुक्त हुए जबकि आरटीएल के अधिकारी गौतम दोषी, हरि नायर और सुरेंद्र पिपारा ने स्वान टेलीकॉम को अक्तूबर 2007 में शाहिद बलवा और विनोद गोयनका को हस्तांतरित किया।


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