खास बातें
- सरकार ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष के अंत तक ऐसी 87 ‘लापता’ कंपनियां थीं जिन्होंने आईपीओ के जरिए राशि जुटाईं लेकिन बाद में उनका पता नहीं लग सका।
नई दिल्ली: सरकार ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष के अंत तक ऐसी 87 ‘लापता’ कंपनियां थीं जिन्होंने आईपीओ के जरिए राशि जुटाईं लेकिन बाद में उनका पता नहीं लग सका।
कारपोरेट मामलों के मंत्री सचिन पायलट ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लापता कंपनियों की सूची में 238 कंपनियां हैं। इन कंपनियों में से 151 का पता लगा लिया गया है जबकि अन्य 87 कंपनियों का अभी तक पता नहीं चल सका है। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2012 के आंकड़ों के अनुसार 87 कंपनियां ऐसी थीं जिन्होंने आरंभिक सार्वजनिक पेशकश आईपीओ) के जरिए राशि जुटाई थी। उन्होंने कहा कि सरकार और सेबी द्वारा ऐसे मामलों में नजर रखी जा रही है। उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि देश में व्यापार शुरू करने के लिए माहौल में सुधार किया जा रहा है और इस संबंध में अधिकतर विलंब राज्य स्तरीय अनुमोदनों के कारण होता है।
पायलट ने कहा कि देश में कारोबार शुरू करने के लिए विभिन्न प्रावधानों को आसान बनाया गया है और कंपनी को रजिस्टर करने के लिए लगने वाले समय को कम करते हुए इसे 48 घंटा कर दिया गया है।
पायलट ने कहा कि निदेशक की पहचान संख्या और कंपनी के नाम की उपलब्धता जैसे विषय को 24 घंटों के अंदर हल किया जा सकता है।