सातवां वेतन आयोग : रेलवे के अधिकारियों की नाराज़गी अब भी बरकरार, पढ़ें क्यों

सातवां वेतन आयोग : रेलवे के अधिकारियों की नाराज़गी अब भी बरकरार, पढ़ें क्यों

सातवां वेतन आयोग अगस्त से लागू हो गया है.

खास बातें

  • रेलवे प्रमोटी ऑफिसर्स एसोसिएशन की कार्यकारिणी की बैठक सितंबर में
  • ग्रुप बी अधिकारियों में है सबसे ज्यादा नाराजगी
  • सातवें वेतन आयोग ने स्वीकारी है मांग, नोटिफिकेशन नहीं हुआ जारी
नई दिल्ली:

सातवां वेतन आयोग लागू हो गया है लेकिन भारतीय रेल के कई अधिकारी अभी भी इस बात को लेकर काफी नाराज हैं कि उनकी मांगें पिछले दो दशक से सुनी नहीं जा रही हैं. रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि रेल मंत्रालय द्वारा उनकी मांगों के स्वीकार किए जाने के बाद भी वित्तमंत्रालय ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया है.

नाराज प्रमोटी ऑफिसर्स फेडरेशन ने अब मिलकर अपनी लड़ाई को आगे ले जाने का फैसला किया है. रेलवे प्रमोटी ऑफिसर्स फेडरेसन के सचिव रमन शर्मा ने एनडीटीवी से बातचीत में बताया है कि सिकंदराबाद में 8-9 सितंबर को संघ की कार्यकारिणी की बैठक होगी. इस बैठक में आगे की रणनीति के बारे में निर्णय लिया जाएगा.
 

अपनी मांगों के संबंध में रमन शर्मा ने बताया कि रेलवे के प्रमोटी अधिकारियों की लंबे समय से मांग रही है कि ग्रुप बी के आठों डिपार्टमेंट के अधिकारियों का वेतन पहले समान रहा करता था लेकिन पांचवें वेतन आयोग में अकाउंट विभाग के अधिकारियों का वेतन ज्यादा कर दिया गया जबकि बाकी सभी सातों विभागों के अधिकारियों का बेसिक वेतन कम रखा गया. तभी से संघ ने लगातार छठे वेतन आयोग के समय भी यही मांग की थी कि इसे बराबर कर दिया जाए, लेकिन तब भी यह मांग नहीं मानी गई.

संघ का कहना है कि अकाउंट विभाग के अधिकारी डेस्क पर बैठकर ही काम करते हैं जबकि रेलवे के बाकी विभाग के अधिकारियों को फील्ड पर जाकर काम करना होता है. इस सबके बावजूद अकाउंट विभाग के अधिकारियों को ज्यादा वेतन दिया जा रहा है.

संघ का दावा है कि उनके अधिकारियों की मांग को रेलवे ने सकारात्मक रूप से सुना और मांग का समर्थन करते हुए वित्तमंत्रालय को अपनी संस्तुति भी भेज दी, लेकिन इस मांग पर अभी भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि रेलवे मंत्रालय ने यह भी बताया था कि इसे लागू करने में महज 1.5 करोड़ रुपये का खर्च आता लेकिन सरकार ने अधिकारियों की इतनी लंबे समय से जारी मांग पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है.

संघ के नेताओं का कहना है कि उनकी एक मांग यह भी है कि रेलवे के ऑर्गेनाइज्ड 80 प्रतिशत अधिकारियों को जो लाभ मिल रहा है वह बाकी बचे अधिकारियों को भी मिलना चाहिए. उन्होंने बताया कि रेलवे में अधिकारियों को तीन साल की नौकरी के बाद अगली ग्रेड का पे दिया जाता है. लेकिन मिसिलेनियस प्रमोटी अधिकारियों को यह लाभ नहीं दिया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि सातवें वेतन आयोग ने इस संबंध में सभी अधिकारियों को चार साल में अगली ग्रेड की पे देने के लिए कहा है, लेकिन अभी भी इस पर नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है और अधिकारियों में असमंजस की स्थिति बरकरार है.

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