खास बातें
- 2जी घोटाला के बाद अब सीधे प्रधानमंत्री के तहत आने वाले इसरो से जुड़े दुर्लभ एस-बैंड स्पेक्ट्रम आवंटन में कथित अनियमतता का मामला सामने आया है।
नई दिल्ली: 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला अभी सुर्खियों में बना ही हुआ है कि अब सीधे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के तहत आने वाले इसरो से जुड़े दुर्लभ एस-बैंड स्पेक्ट्रम आवंटन में कथित अनियमतता का मामला सामने आया है। इस पर भाजपा सहित अन्य विपक्षी दलों ने इसके आवंटन को तुरंत रद्द करने और प्रधानमंत्री से सफाई देने की मांग की है। भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा, यह आश्चर्यजनक बात है कि सीधे प्रधानमंत्री के तहत आने वाले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के दुर्लभ एस-बैंड स्पेक्ट्रम आवंटन में घोटाला हुआ है। पार्टी ने अपना रुख और आक्रमक करते हुए कहा कि इस नए रहस्योद्घाटन को देखते हुए प्रधानमंत्री को सबसे पहले तीन काम करने चाहिए। दुर्लभ एस-बैंड स्पेक्ट्रम के एक निजी कंपनी को गुप-चुप किए गए आवंटन को तुरंत रद्द किया जाए, इस आवंटन से राजस्व को हुए नुकसान को वापस लिया जाए और सिंह इस संबंध में तुरंत स्पष्टीकरण दें। ऐसी खबरें हैं कि कैग ने देवास मल्टीमीडिया के साथ हुए इसरो के समझौते की जांच शुरू कर दी है। इस समझौते के तहत देवास मल्टीमीडिया को कथित तौर पर 20 साल के लिए दुलर्भ एस बैंड स्पेक्ट्रम का 70 मेगा हर्ट्ज़ उपलब्ध कराया जाएगा। सीतारमण ने आरोप लगाया कि इसरो के ही पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार एमजी चन्द्रशेखर अब देवास मल्टीमीडिया के चेयरमैन हैं जिसे गुप चुप तरीके से यह दुर्लभ स्पेक्ट्रम बहुत ही सस्ते दाम में आवंटित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस घोटाले का अंदाजा इन तथ्यों से ही लगाया जा सकता है कि इस दुर्लभ 190 मेगाहर्ट्ज़ एस-बैंड स्पेक्ट्रम में से 70 मेगा हर्ट्ज़ एमटीएनएल और बीसीएनएल को लगभग साढ़े बारह हजार करोड़ रुपये में आवंटित किया गया जबकि देवास मल्टीमीडिया को महज एक हजार करोड़ रुपये में।