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This Article is From Sep 09, 2025

जब धर्म के कारण देव आनंद का प्यार रह गया अधूरा, फिर इस एक्ट्रेस से फिल्म की शूटिंग के बीच की शादी

जब देव और सुरैया एक ना हो सके तो फिर देव साहब की जिंदकी में कल्पना कार्तिक नई रोशनी बनकर आईं. कल्पना का असली नाम मोना सिंघा था.

जब धर्म के कारण देव आनंद का प्यार रह गया अधूरा, फिर इस एक्ट्रेस से फिल्म की शूटिंग के बीच की शादी
जब धर्म के कारण देव आनंद का प्यार रह गया अधूरा
नई दिल्ली:

'है अपना दिल तो आवारा…' फिल्म सोलवा साल का ये गाना सिर्फ फिल्मी पर्दे पर ही नहीं बल्कि देव आनंद की जिंदगी पर भी फिट बैठता है. देव साहब की जिंदगी पर्दे जितनी रंगीन थी, उतनी ही दिलचस्प पर्दे के पीछे भी रही. देव साहब को सुरैया से प्यार हुआ था और वो उनका पहला प्यार थीं. दोनों एक-दूजे को बहुत चाहते थे, लेकिन धर्म की दीवार ने इस लव-स्टोरी को दफना दिया. जब देव और सुरैया एक ना हो सके तो फिर देव साहब की जिंदकी में कल्पना कार्तिक नई रोशनी बनकर आईं. कल्पना का असली नाम मोना सिंघा था. मिस शिमला का खिताब जीतने के बाद चेतन आनंद ने हिंदी सिनेमा में मौका दिया था. इस दौरान देव की मुलाकात कल्पना से हुई.

देव आनंद की मोहब्बत और पत्नी

दोनों ने फिल्म टैक्सी ड्राइवर में काम किया और दोनों की दोस्ती कब प्यार में बदल गई पता नहीं चला. इस फिल्म की शूटिंग को दौरान अचानक लंबे समय के लिए गायब हो गये और जब लौटे तो दोनों की उंगली में रिंग थी और फिर पता चला कि दोनों कोर्ट मैरिज करके आए हैं. उस वक्त देव साहब ने साफतौर पर कहा था, 'शादी एक निजी फैसला है, इसे तमाशा बनाने की जरूरत नहीं'. कल्पना कार्तिक ईसाई-पंजाबी परिवार से थीं और देव साहब हिंदू थे. दोनों ने मजहबी दीवार तोड़ शादी की और साथ में जीवन बिताया. कपल की शादी साल 1954 में हुई थी. शादी के बाद कल्पना ने फिल्मों से दूरी बना ली. दोनों के दो बच्चे हुए सुनील आनंद और देबीना.
 

देव साहब का फिल्मी करियर

वहीं, देव आनंद का जन्म पाकिस्तान के गुरदासपुर में हुआ था. एक्टर पढ़ाई-लिखाई में अच्छे थे, लेकिन पैसों की कमी ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया. ऐसे में एक्टर बनने का शौक उन्हें मुंबई ले गया और सिर्फ 20 रुपये लेकर मुंबई पहुंचे और स्टेशन के पास एक छोटे से होटल में तीन और स्ट्रगलिंग एक्टर्स के साथ दिन बिताने लगे. बाद में एक्टर को मिलिट्री सेंसर ऑफिस में नौकरी मिली, जहां उन्हें 165 रुपये पगार मिलती थी, लेकिन फिल्मी दुनिया की चकाचौंध उनके आंखों के आगे चमकती रही. बड़े भाई चेतन आनंद की मदद से छोटे-मोटे रोल मिले थे और फिर 1946 में हम एक हैं से उनकी शानदार शुरुआत हुई. जिद्दी (1947) से वो स्टार बन गए और फिर टैक्सी ड्राइवर, नौ दो ग्यारह, गाइड जैसी फिल्मों ने उन्हें देव साहब को सदाबहार रोमांटिक हीरो बना दिया. 3 दिसंबर 2011 में उनका निधन हो गया और उनकी पत्नी कल्पना कार्तिक आज 93 साल की उम्र में पोते-पोतियों के साथ खेल रही हैं.



 

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