साल 1964 में आई फिल्म ‘संगम' हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में गिनी जाती है. राज कपूर, वैजयंतीमाला और राजेंद्र कुमार स्टारर इस फिल्म ने सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर ही नहीं, बल्कि फिल्म बनाने के तरीके में भी नया इतिहास रचा था. इस फिल्म से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा आज भी लोगों को हैरान कर देता है. कहा जाता है कि फिल्म के मशहूर गाने ‘बोल राधा बोल संगम होगा कि नहीं' का जन्म एक टेलीग्राम से हुआ था. राज कपूर चाहते थे कि वैजयंतीमाला फिल्म में राधा का किरदार निभाएं. उन्होंने अभिनेत्री को कहानी भी सुना दी थी, लेकिन उनकी तरफ से जवाब आने में समय लग रहा था. इसी इंतजार के दौरान राज कपूर ने एक ऐसा टेलीग्राम भेजा, जिसने बाद में हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय गानों में से एक को जन्म दे दिया.
एक टेलीग्राम से मिला गाने का आइडिया
बताया जाता है कि वैजयंतीमाला की तरफ से जवाब न मिलने पर राज कपूर ने उन्हें एक टेलीग्राम भेजा. उसमें लिखा था, “बोल राधा बोल, ये संगम होगा या नहीं?” कुछ समय बाद वैजयंतीमाला का जवाब आया, “होगा… होगा… होगा.” यह जवाब पढ़ते ही राज कपूर को गाने की लाइन सूझ गई. बाद में यही शब्द फिल्म के मशहूर गीत ‘बोल राधा बोल संगम होगा कि नहीं' का हिस्सा बने. वर्षों बाद रणबीर कपूर ने भी इस किस्से का जिक्र करते हुए बताया था कि कैसे उनके दादा की रचनात्मक सोच ने एक साधारण टेलीग्राम को यादगार गीत में बदल दिया.
‘संगम' ने रचा था इतिहास
‘संगम' सिर्फ अपने गानों और कहानी की वजह से खास नहीं थी. यह पहली भारतीय फिल्म मानी जाती है जिसकी शूटिंग बड़े पैमाने पर यूरोप में की गई थी. फिल्म के कई हिस्से लंदन, पेरिस, स्विट्जरलैंड और वेनिस जैसी जगहों पर फिल्माए गए थे. उस दौर में विदेश में शूटिंग करना बहुत बड़ी बात थी. राज कपूर ने अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म के लिए बड़ा बजट लगाया और दर्शकों को ऐसे दृश्य दिखाए, जो उन्होंने पहले कभी नहीं देखे थे. रिलीज के बाद ‘संगम' साल 1964 की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल हुई और आज भी इसे हिंदी सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है.
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