वैजयंतीमाला हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन एक्ट्रेस ही नहीं, बल्कि एक उम्दा क्लासिकल डांसर भी रही हैं. वे एक्टिंग के लिए वे जितनी पैशनेट थीं, नृत्य के लिए भी उतनी ही डेडिकेटेड थीं. डांस के लिए उनके पैशन का एक रेयर किस्सा है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. उनकी बायोग्राफी Bonding... A Memoir में इस किस्से का जिक्र किया गया है. इस किताब को दिग्गज अभिनेत्री वैजयंतीमाला ने ज्योति सभरवाल के साथ मिलकर खुद लिखी है. उनके लिए, 'हर चीज डांस से शुरू और खत्म होती है . उनका मानना है कि यही उनके होने का मकसद है.
नंगे बिजली के तार से लगा था तेज झटका
किताब 'बॉडिंग ओ मेमोयर' के अनुसार, जब वह सिर्फ साढ़े चार-पांच साल की थीं, तब से ही भरतनाट्यम के प्रति उनकी बेहद रूची थी. वह जिस तरह एक्टिंग को पूजा मानती उसी तरह डांस भी उनकी रग- रग में बहता था. उनके इसी पेशन को देखते हुए जब वह चार साल की थी तब उन्हें एक न्यू ईयर इवेंट में स्टेज परफॉर्मेंस के लिए चुना गया था. शो की तैयारियं पूरी हो चुकी थीं और वैजयंतीमाला स्टेज के पीछे अपनी बारी का इंतजार कर रही थीं. तभी अचानक उनका पैर एक नंगे बिजली के तार पर पड़ गया. उन्हें इतना जौरदार करंट का झटका लगा था कि वह दूर जा गिरी और मौके पर ही बेहोश हो गई,
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Vyjayanti Mala
Photo Credit: instagarm
होशी से उठते ही कहा- 'मुझे डांस करना है
नन्हीं वैजयंतीमाला जैसे ही बैकस्टेज पर करंट के झटके से बेहोश हुई हड़कंप मच गया. आर्गनाईजर ने तुरंत डॉक्टर को बुलवाया और उन्हें तुरंत उस समय फर्स्ट एड देकर होश में लाया गया, जिसके बाद आयोजकों और परिवारवालों ने शो रद्द करने का मन बना लिया था, लेकिन जैसे ही नन्हीं वैजयंतीमाला की आंखें खुलीं, उसने रोने या डरने के बजाय होश संभालते हुए सबसे पहला सवाल पूछा कि क्या मेरी परफॉर्मेंस का टाइम हो गया?. डॉक्टर और परिवार के मना करने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मुस्कुराते हुए स्टेज पर उतरकर ऐसी शानदार परफॉर्मेंस दी कि पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा.

'देवदास' में चंद्रमुखी
इसी जुनून से मिली सुपरस्टार की पहचान
महज साढ़े चार साल की उम्र में दिखा यह जुनू ही आगे चलकर उनकी पहचान बना. चाहे फिल्म 'देवदास' में चंद्रमुखी का आइकॉनिक रोल हो या 'संगम' और 'नागिन' का डांस, वैजयंतीमाला ने हर कदम पर यह साबित किया कि कला उनके खून में दौड़ती है. उनके दर्शकों में राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री, बड़े और ताकतवर लोग शामिल थे.
उन्होंने 1950 के दशक के आखिर में UNESCO के लिए लंदन के पेरिस में सारा बर्नहार्ड थिएटर में स्काला थिएटर और मॉस्को में बोल्शोई थिएटर में परफॉर्म किया. और उन्हें 1969 में ह्यूमन राइट्स के डिक्लेरेशन की 21वीं एनिवर्सरी मनाने के लिए यूनाइटेड नेशंस की जनरल असेंबली में भरतनाट्यम परफ़ॉर्मेंस देने वाली पहली इंडियन डांसर होने का अनोखा सम्मान मिला, जिसके लिए 120 से ज्यादा देशों के थिंक-टैंक्स ने स्टैंडिंग ओवेशन दिया. इतना ही नहीं वह सिडनी के इंटरनेशनल ओपेरा हाउस में डांस करने वाली पहली इंडियन आर्टिस्ट थीं.
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