दक्षिण भारतीय सिनेमा के मेगास्टार चिरंजीवी का नाम आते ही दमदार अभिनय, शानदार डांस और जबरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस की तस्वीर सामने आ जाती है. उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर तेलुगु सिनेमा में ऐसी पहचान बनाई कि दर्शक उनकी फिल्मों के दीवाने हो गए. उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भारतीय फिल्म उद्योग के सबसे सफल अभिनेता-नर्तक के रूप में जगह मिली. हालांकि, फिल्मों में सफलता हासिल करने वाले चिरंजीवी जब राजनीति में उतरे, तो उन्हें वैसी कामयाबी नहीं मिली. उनकी राजनीतिक पारी कई उतार-चढ़ाव से भरी रही.
1978 में शुरू हुआ फिल्मी सफर, बने तेलुगु सिनेमा के सुपरस्टार
22 अगस्त 1955 को आंध्र प्रदेश के मोगलथुर में जन्मे चिरंजीवी का असली नाम कोणिदेल शिव शंकर वर प्रसाद है. बचपन से ही उन्हें अभिनय में दिलचस्पी थी. इसी सपने को पूरा करने के लिए वह चेन्नई पहुंचे और मद्रास फिल्म इंस्टीट्यूट में अभिनय की ट्रेनिंग ली. साल 1978 में उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपनी दमदार अदाकारी के दम पर सुपरस्टार बन गए.
चिरंजीवी ने तेलुगु के अलावा हिंदी, तमिल और कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया है. उन्हें तीन नंदी पुरस्कार, नौ फिल्मफेयर अवॉर्ड साउथ और लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है. साल 2006 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से नवाजा था. साल 2024 में उन्हें पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया.
अमिताभ बच्चन से ज्यादा फीस मिलने का हुआ था दावा
चिरंजीवी की लोकप्रियता का अंदाजा उनकी कमाई से भी लगाया जाता है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अपने सफल दौर में उनकी एक फिल्म की फीस अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा हो गई थी. हालांकि, इन पुराने दावों की स्वतंत्र पुष्टि करना मुश्किल है. इसी तरह उनकी कुल संपत्ति को लेकर भी अलग-अलग अनुमान सामने आते रहे हैं.
चिरंजीवी के नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भारतीय फिल्म उद्योग के सबसे सफल अभिनेता-नर्तक का रिकॉर्ड दर्ज है. सितंबर 2024 में उन्हें यह सम्मान मिला. उनके लंबे करियर और शानदार डांस के लिए उन्हें यह उपलब्धि दी गई थी.
राजनीति में बनाई पार्टी, फिर कांग्रेस में कर दिया विलय
फिल्मों में अपार सफलता हासिल करने के बाद चिरंजीवी ने राजनीति में कदम रखा. साल 2008 में उन्होंने प्रजा राज्यम पार्टी बनाई. 2009 के आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली. बाद में 2011 में उन्होंने अपनी पार्टी का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में विलय कर दिया.
इसके बाद चिरंजीवी राज्यसभा पहुंचे और 2012 में केंद्र सरकार में पर्यटन राज्य मंत्री बने. उन्होंने 2014 तक यह जिम्मेदारी संभाली. हालांकि, बाद के वर्षों में उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली और फिल्मों पर ध्यान केंद्रित किया. उनके छोटे भाई पवन कल्याण ने अपनी पार्टी जनसेना के जरिए राजनीति में अलग पहचान बनाई. इस तरह चिरंजीवी का सफर बताता है कि फिल्मों में सुपरस्टार बनने और राजनीति में सफलता पाने के लिए अलग-अलग तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.
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