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शराब के नाम पर रखा नाम, 26 रुपये की सैलरी करता था कंडक्टर की नौकरी, फिर बना बॉलीवुड का स्टार कॉमेडियन, Gen-Z नहीं जान पाएंगे इसका नाम

हम आज आपको बॉलीवुड के एक ऐसे कलाकार से रूबरू करवाने वाले हैं. जिसे हर दौर के दर्शकों ने खूब पसंद किया है, लेकिन Gen-Z के लिए इस कलाकार को पहचानने में थोड़ी मुश्किल आ सकती है.

शराब के नाम पर रखा नाम, 26 रुपये की सैलरी करता था कंडक्टर की नौकरी, फिर बना बॉलीवुड का स्टार कॉमेडियन, Gen-Z नहीं जान पाएंगे इसका नाम
जॉनी वॉकर ने अपनी कलाकारी से लोगों के चेहरे पर बिखेरी मुस्कान
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ये दौर Gen-Z का है, जो सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहता है. Gen-Z फिल्में भी देखते हैं, लेकिन उनके दौर के कलाकार आज के दौर के हैं. लेकिन हम आज आपको बॉलीवुड के एक ऐसे कलाकार से रूबरू करवाने वाले हैं. जिसे हर दौर के दर्शकों ने खूब पसंद किया है, लेकिन Gen-Z के लिए इस कलाकार को पहचानने में थोड़ी मुश्किल आ सकती है. हम बात कर रहे हैं हिंदी सिनेमा के दिग्गज कलाकार जॉनी वॉकर की. जॉनी वॉकर ने अपनी अनोखी कॉमेडी से न सिर्फ दर्शकों को गुदगुदाया, बल्कि उनके चेहरों पर स्थायी मुस्कान भी बिखेरी. लगभग 300 फिल्मों में काम करने वाले इस कलाकार ने बॉलीवुड में कॉमेडी की एक सभ्य और जीवन से जुड़ी परंपरा स्थापित की.

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शराब के नाम पर रखा नाम

11 नवंबर 1926 को इंदौर में जन्मे जॉनी वॉकर का असली नाम बदरुद्दीन जमालुद्दीन था. अभिनेता-निर्देशक गुरुदत्त ने उन्हें फिल्मों में लाने के बाद एक मशहूर शराब ब्रांड के नाम पर ‘जॉनी वॉकर' नाम दिया. दिलचस्प बात यह है कि फिल्मों में वे अक्सर शराबी के किरदार निभाते थे, लेकिन वास्तविक जीवन में उन्होंने कभी शराब का स्वाद तक नहीं चखा. उनकी कॉमेडी कभी अश्लील या घटिया नहीं होती थी. वह आम आदमी के जीवन से जुड़ी, सहज और हल्की-फुल्की होती थी.

26 रुपये वेतन

गुरुदत्त की क्लासिक फिल्में ‘प्यासा', ‘कागज के फूल', ‘चौदहवीं का चांद' और ‘मिस्टर एंड मिसेज 55' में उनके किरदार आज भी याद किए जाते हैं. ‘मधुमती', ‘चोरी-चोरी' और अन्य कई फिल्मों में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी. मुंबई आने के शुरुआती दिनों में जॉनी वॉकर बस कंडक्टर का काम करते थे. महीने के मात्र 26 रुपये वेतन पर काम करते हुए भी वे बस में सवार यात्रियों का मनोरंजन करते रहते थे. वर्ष 1955 में उन्होंने अभिनेत्री नूरजहां से विवाह किया. दोनों के छह बच्चे हुए. जॉनी वॉकर ने बच्चों की अच्छी शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया और उन्हें अमेरिका भेजा.

जॉनी वॉकर की फिल्में

‘जाल', ‘आंधियां', ‘नया दौर', ‘टैक्सी ड्राइवर', ‘मधुमती', ‘कागज के फूल', ‘गेटवे ऑफ इंडिया', ‘मिस्टर एक्स', ‘मेरे महबूब' और ‘सीआईडी' जैसी हिट फिल्मों में उनके अभिनय ने दर्शकों को खूब हँसाया. 1959 में ‘मधुमती' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला. बाद में ‘शिकार' के लिए सर्वश्रेष्ठ कॉमिक अभिनेता का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी उनके नाम हुआ.

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