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मोहम्मद रफी का 69 साल पुराना गाना, बना 'सिरदर्द का इलाज', विज्ञापनों में खूब हुआ इस्तेमाल, आज भी कहलाता है चंपी सॉन्ग

इंदौर में जन्मे बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी फिल्मों में आने से पहले मुंबई में बेस्ट बस कंडक्टर थे. गुरु दत्त ने उन्हें 'जॉनी वॉकर' नाम दिया, जबकि उन्होंने जिंदगी में कभी शराब नहीं पी. बाद में मोहम्मद रफी उनकी ऑनस्क्रीन आवाज बन गए.

मोहम्मद रफी का 69 साल पुराना गाना, बना 'सिरदर्द का इलाज', विज्ञापनों में खूब हुआ इस्तेमाल, आज भी कहलाता है चंपी सॉन्ग
मोहम्मद रफी का 69 साल पुराना गाना, जो चंपी के लिए खूब गाया जाता है
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नई दिल्ली:

मोहम्मद रफी ने कई गाने गाए. लेकिन वह एक एक्टर की 150 गानों में आवाज बने, जिनका नाम तो था शराब के ब्रांड के नाम पर. लेकिन उन्होंने कभी रियल लाइफ में शराब को हाथ नहीं लगा. यहां तक कि उनका एक गाना, जो आज न सिर्फ सिर दर्द के इलाज में खूब गुनगुनाया जाता है. बल्कि आज भी चंपी सॉन्ग कहलाता है. हम बात कर रहे हैं मोहम्मद रफी के 69 साल पुराने गाने की, जिसका इस्तेमाल विज्ञापन में ही नहीं चंपी करते हुए खूब इस्तेमाल हुआ. वहीं इस फिल्म में जॉनी वॉकर लीड रोल में नजर आए थे. 

बस कंडक्टर से बन गए जॉनी वॉकर

बहुत कम लोग जानते हैं कि जॉनी वॉकर का असली नाम बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी था और उनका जन्म इंदौर में हुआ था. फिल्मों में आने से पहले वह मुंबई की बेस्ट बस सेवा में कंडक्टर की नौकरी करते थे. बस में सफर करने वाले लोगों की नकल उतारकर और चुटकुले सुनाकर वह यात्रियों का मनोरंजन किया करते थे. उनकी यही कला अभिनेता बलराज साहनी की नजर में आई, जिन्होंने उन्हें गुरु दत्त से मिलवाया. स्क्रीन टेस्ट में शराबी का किरदार निभाने के बाद गुरु दत्त ने उन्हें 'जॉनी वॉकर' नाम दे दिया. दिलचस्प बात यह है कि असल जिंदगी में उन्होंने कभी शराब नहीं पी.

चार दशक तक किया लोगों का मनोरंजन

जॉनी वॉकर ने करीब चार दशक लंबे करियर में लगभग 300 फिल्मों में काम किया. उन्होंने दिलीप कुमार, देव आनंद, राज कपूर और गुरु दत्त जैसे बड़े सितारों के साथ कई यादगार फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाई. कई फिल्मों में तो उनके किरदार के लिए अलग से गाने भी लिखे गए, जो उस दौर में बहुत कम कलाकारों को नसीब होता था.

मोहम्मद रफी की आवाज बनी सबसे बड़ी पहचान

मोहम्मद रफी को जॉनी वॉकर की ऑनस्क्रीन आवाज माना जाता था. उन्होंने उनके लिए करीब डेढ़ सौ गाने गाए और अपनी गायकी को अभिनेता के अंदाज के हिसाब से ढाल दिया. यही वजह है कि 'सर जो तेरा चकराए', 'ये है बॉम्बे मेरी जान' और 'जाने कहां मेरा जिगर गया जी' जैसे गाने आज भी दोनों की जोड़ी की सबसे बड़ी पहचान माने जाते हैं. कहा जाता है कि रिकॉर्डिंग से पहले रफी उनके बोलने और अभिनय के अंदाज को ध्यान से देखते थे, ताकि पर्दे पर ऐसा लगे जैसे जॉनी वॉकर खुद गा रहे हों. यही वजह है कि 'सर जो तेरा चकराए', 'ये है बॉम्बे मेरी जान' और 'जाने कहां मेरा जिगर गया जी' जैसे गाने आज भी इस जोड़ी की पहचान बने हुए हैं.

सर जो तेरा चकराए की खूब हुई चर्चा

जॉनी वॉकर पर फिल्माया गया और मोहम्मद रफी का गाना सर जो तेरा चकराए इतना फेमस हुआ कि इसे विज्ञापनों में भी इस्तेमाल किया गया. यहां तक कि आज भी अगर सिर पर चंपी करना हो तो इस गाने की यादें फैंस के बीच ताजा हो जाती है. जो लोग नहीं जानते उन्हें बता दें कि सर जो तेरा चकराए गाना 1957 में आई प्यासा फिल्म का गाना है, जिसमें माला सिन्हा, गुरू दत्त और वहीदा रहमान भी नजर आए थे. फिल्म के म्यूजिक का डायरेक्शन एसडी बर्मन ने किया था. 

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