बॉलीवुड के कुछ विलेन अपनी अदायगी से ज्यादा किसी खास डायलॉग या स्टाइल की वजह से ज्यादा हिट हो जाते हैं. ऐसे ही एक खूंखार विलेन थे, जो अपने डायलॉग मोना डार्लिंग की वजह से आज भी याद किए जाते हैं. अपने इस खास अंदाज की वजह से इस विलेन ने जम कर सुर्खियां बटोरी और अमर भी हो गए. अजीत नाम से वो सिल्वर स्क्रीन पर हिट हुए, जिनकी आवाज की सख्ती और स्माइल ही खौफ का दूसरा नाम बन चुके थे. पर रियल लाइफ में वक्त के थपेड़े खाकर वो इस मुकाम तक पहुंचे. और यारों के यार ऐसे की एक पूर्व पीएम से भी उनकी दोस्ती मिसाल बनी रही.
पाइप में गुजारे दिन
अजीत का असली नाम हामिद अली खान था. उनके पिता हैदराबाद के निजाम के ड्राइवर थे और चाहते थे कि बेटा डॉक्टर या वकील बने. लेकिन अजीत का मन पढ़ाई में नहीं, एक्टिंग में लगता था. एक दिन उन्होंने अपनी किताबें बेच दीं और घर से भागकर मुंबई आ गए. मुंबई आकर उन्हें न काम मिला, न रहने की जगह. अजीत पहले दोस्त के घर रुके फिर हालात ऐसे बिगड़े कि नाले में पड़े सीमेंट के पाइप में रातें गुजारनी पड़ीं. वहां लोकल गुंडे पैसे मांगते थे. लेकिन अजीत ने उन्हें डटकर जवाब दिया. यही जिद और हिम्मत आगे चलकर उनके काम आई.
शुरुआत में उन्हें सिर्फ एक्स्ट्रा के छोटे-मोटे रोल मिले. बाद में लीड रोल भी मिले, लेकिन फिल्में नहीं चलीं. तब नानाभाई भट्ट ने उनका नाम बदलकर अजीत खान रखने की सलाह दी. इसके बाद उनकी किस्मत बदली और वो बड़े बड़े विलेन रोल करने लगे.

पूर्व प्रधानमंत्री से दोस्ती
कम लोग जानते हैं कि अजीत और पीवी नरसिम्हा राव कॉलेज के दिनों में एक ही हॉस्टल में रहते थे. दोनों के बीच अच्छी दोस्ती थी. आगे चलकर वही दोस्त देश का प्रधानमंत्री बना. अजीत खान ने तीन शादियां कीं. पहली शादी टूट गई. दूसरी पत्नी शाहिदा से तीन बेटे हुए. लेकिन उनकी मौत ने अजीत को तोड़ दिया. बाद में तीसरी शादी से शहजाद और अरबाज हुए. 1998 में हार्ट अटैक से अजीत खान का निधन हो गया. उन्होंने 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और ‘जंजीर', ‘मुगल-ए-आजम' जैसी फिल्मों से अमर हो गए. आज भी उनकी गिनती उम्दा विलेन्स में होती है.
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