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भारत-पाकिस्तान के विभाजन की मांग करने वाले वो शायर, जिन्होंने लिखा था, 'सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा'

'सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा', लिखने वाले इस शायर ने विभाजन की मांग की थी. वहीं उनकी लेखनी ने धर्म के परे जाकर देश और भगवान राम को पवित्रता, बहादुरी और प्रेम से भरा बताया था. 

भारत-पाकिस्तान के विभाजन की मांग करने वाले वो शायर, जिन्होंने लिखा था, 'सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा'
भारत-पाकिस्तान के विभाजन की मांग करने वाला शायर
नई दिल्ली:

'खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले, खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है...' आत्म-शक्ति को बुलंद करती यह पंक्तियां हर किसी की जुबान पर रहती हैं और उन्हें लिखा था उर्दू व फारसी के प्रसिद्ध शायर अल्लामा मोहम्मद इकबाल ने. पाकिस्तान में जन्मे इस शायर की लेखनी ने धर्म के परे जाकर देश और भगवान राम को पवित्रता, बहादुरी और प्रेम से भरा बताया था. उनके द्वारा प्रभु श्री राम को लेकर लिखी कविता 'लबरेज़ है शराब-ए-हक़ीक़त से जाम-ए-हिंद' आज भी याद की जाती है. 

कश्मीरी मुस्लिम परिवार में हुआ मुहम्मद इकबाल का जन्म

उर्दू, अरबी और फारसी साहित्य के एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व्यक्ति मुहम्मद इकबाल का जन्म भारत के सियालकोट में एक कश्मीरी मुस्लिम परिवार में हुआ था. जन्म के समय भारत और पाकिस्तान एक ही देश थे, और यही कारण है कि मोहम्मद इकबाल की लेखनी में हमेशा भारत का गौरव और उर्दू का तालमेल देखने को मिला. मोहम्मद इकबाल की कविताओं में भले ही प्रेम और आत्मविश्वास देखने को मिला, लेकिन अपने शुरुआती दिनों में उनकी कलम में अंग्रेजों के शासन के खिलाफ विरोध झलकता था. उनकी कलम उर्दू में कविताएं लिखती, जिसमें भारतीय राष्ट्रवाद के प्रति उनकी प्रतिबद्धता साफ दिखती थी.

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केवल उर्दू में लिखी शायर इकबाल 

भले ही अपने शुरुआती समय में शायर इकबाल केवल उर्दू में कविताएं लिखीं, लेकिन साल 1903 तक आते-आते उन्होंने दर्शनशास्त्र, अंग्रेजी साहित्य और अरबी भाषा का ज्ञान प्राप्त कर लिया था और बतौर अरबी शिक्षक ओरिएंटल कॉलेज में काम भी किया. 1908 में उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से दर्शनशास्त्र में डिग्री और म्यूनिख यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की और एक बैरिस्टरशिप की योग्यता लेकर भारत एक वकील बनकर लौटे. 

"सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा" लिखा गीत

"सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा" गीत भी शायर इकबाल की कलम से ही जन्मा था. 15 अगस्त 1947 को देश को आजादी मिलते ही इसी गीत को मध्य रात्रि में संसद भवन में गाया गया. इतना ही नहीं, भारत-पाकिस्तान विभाजन में शायर का भी यही मत था कि देश को दो भागों में बंट जाना चाहिए. साल 29 दिसंबर 1930 को इलाहाबाद में मुस्लिम लीग के 25वें अधिवेशन में मोहम्मद इकबाल को अध्यक्ष चुना गया था और उन्होंने ही मोहम्मद अली जिन्ना को मुस्लिम लीग में शामिल होने के लिए प्रेरित कर अलग राष्ट्र की मांग को बुलंद किया था.

पंजाब को भी पाकिस्तान में मिलाने की कही थी बात

शायर इकबाल को पाकिस्तान का आध्यात्मिक पिता भी माना जाता है. शायर ने अपनी शायरी के जरिए मुसलमानों को इस्लाम के प्रति जागरूक कर चेतना जगाई थी. अपने भारत में उन्होंने पंजाब को भी पाकिस्तान में मिलाने की बात कही थी. कहा जाता है कि राष्ट्रवादी सोच रखने वाले शायर की सोच में समय के साथ बहुत परिवर्तन आया और वे कठोर कट्टरपंथी होते चले गए.  

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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