बॉलीवुड में कई नामचीन गीतकार हुए, जिन्होंने अपने शब्दों से ऐसा जादू रचा कि सुनने वालों के सीधे दिल में उतर गए और दशकों तक ये गाने सुने जाते रहे. आज हम ऐसे ही एक गीतकार की बात कर रहे हैं, जिनके लिखे गाने बॉलीवुड के सबसे बड़े सिंगर्स ने गाए. लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी ने इनके लिखे गानों को अपनी आवाज दी. लेकिन इन्हें बड़ी सफलता मिली सलमान खान की पहली सुपरहिट फिल्म से. इस फिल्म ने सलमान को भी मशहूर कर दिया और इस गीतकार को भी देश भर में पहचान दिलाई.
हम बात कर रहे हैं गीतकार असद भोपाली की. 10 जुलाई 1920 को भोपाल में जन्मे असद भोपाली का असली नाम असदुल्ला खान था. अपने पिता मुंशी अहमद खान के सबसे बड़े बेटे थे. फारसी, अरबी, उर्दू और अंग्रेजी के अच्छे जानकार असद 28 साल की उम्र में गीतकार बनने के लिए मुंबई चले गए.
भीड़ में बनाई पहचान
उस समय कुमार बाराबंकवी, जान निसार अख्तर, राजेंद्र कृष्ण, डी.एन. मधोक और प्रेम धवन जैसे मशहूर गीतकार गीत लेखन के क्षेत्र में अपनी काबिलियत साबित कर चुके थे. इसके अलावा, मजरूह सुल्तानपुरी, शकील बदायूंनी, हसरत जयपुरी और शैलेंद्र जैसे बड़े गीतकार भी फिल्म इंडस्ट्री में मौजूद थे, लेकिन असद भोपाली ने इन मुश्किल हालात में भी अपनी काबिलियत साबित की और अपनी एक अलग पहचान बनाई.
फिल्मों में आने वाले भोपाल के पहले शायर
वह भोपाल के पहले ऐसे शायर थे, जिन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था. जब वह 1949 में मुंबई आए तो फजली ब्रदर्स 'दुनिया' नाम की फिल्म बनाने की योजना बना रहे थे. आरजू लखनवी ने इस फिल्म के लिए दो गाने लिखे थे, लेकिन बाद में वह पाकिस्तान चले गए. फजली ब्रदर्स अब फिल्म के बाकी गाने लिखने के लिए किसी दूसरे गीतकार की तलाश में थे. किस्मत ने साथ दिया और असद भोपाली को फिल्म के लिए दो गाने लिखने का मौका मिला, और दोनों ही गाने सुपरहिट साबित हुए.

इसके बाद असद से ब्रेक बी.आर. चोपड़ा की क्लासिक फिल्म 'अफसाना' के गाने लिखने के लिए कहा गया. इस फिल्म के छह गाने असद ने लिखे थे और सभी बहुत पॉपुलर हुए. 1949 से 1990 के बीच असद भोपाली ने लगभग 100 फिल्मों में 400 से ज्यादा गाने लिखे.
उम्र के आखिरी पड़ाव पर दिए ये दो सुपरहिट गाने
1989 में उन्होंने फिल्म 'मैंने प्यार किया' के गाने लिखे जो सुपरहिट रहे. 'दिल दीवाना बिन सजना के माने ना' और ‘कबूतर जा जा' गाना असद भोपाली ने ही लिखा है. गाने के लिए असद भोपाली को फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. असद भोपाली को 1990 के फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में बुलाया गया था, लेकिन बीमारी के कारण वे शामिल नहीं हो पाए. 9 जून 1990 को उनका निधन हो गया.
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