करिश्मा कपूर और उनके एक्स हसबैंड और बिजनेसमैन संजय कपूर के बच्चे, समायरा और कियान ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक नई याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उनके पिता संजय कपूर की वसीयत पर सिग्नेचर फर्जी हैं. उनका दावा है कि उन्हें उनकी संपत्ति से बाहर करने के लिए डॉक्यूमेंट्स में हेराफेरी की गई है. बता दें, बच्चों ने उनके पिता की तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है. बच्चों ने वसीयत को जाली बताया है और मांग की है कि प्रिया सचदेव कपूर पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 338 और 340 के तहत मुकदमा चलाया जाएगा. आइए जानते हैं इस बारे में.
दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा?
समायरा कपूर और कियान कपूर ने अदालत में सौतेली मां, प्रिया सचदेव कपूर और वसीयत की एग्जीक्यूटर श्रद्धा सूरी मारवाह के खिलाफ याचिका दायर की है. ऐसे में दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. आपको बता दें, 12 जून 2025 को संजय कपूर का निधन हो गया था. जिसके बाद से ही वसीयत लेकर गर्मागर्मी बढ़ गई है. अब इस मामले पर अगली सुनवाई 20 जनवरी को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट गगनदीप सिंह के सामने होगी. करिश्मा और संजय के बच्चों ने कहा कि वसीयत के आधार पर दोनों को संपत्ति से बाहर कर दिया गया है, जो पूरी तरह से झूठी है. आपको बता दें, अगर कोर्ट में यह बात सही साबित हुई थी प्रिया कपूर पर कई आपराधिक धाराएं लग सकती हैं.
जब वसीयत पर हुए थे सिग्नेचर, तब गुरुग्राम में नहीं थे बच्चे
समायरा और कियान ने कहा कि वसीयत पर सिग्नेचर फर्जी है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 21 मार्च को वसीयत पर साइन होने का दावा किया जा रहा है, हालांकि इस पर बच्चों का कहना है कि जिस समय वसीयत पर सिग्नेचर होने का दावा किया जा रहा है, उस दिन प्रिया कपूर और संजय कपूर दिल्ली में थे, न कि गुरुग्राम में. यही नहीं उनकी मां संजय कपूर से व्हाट्सएप पर बच्चों के पुर्तगाली नागरिकता से जुड़ी बात कर रही थी.
प्रिया कपूर की तरफ से कोर्ट को क्या बताया गया?
वहीं प्रिया कपूर की ओर से कोर्ट को बताया जा रहा है 10 फरवरी 2025 को वसीयत ड्राफ्ट की गई थी. जिसके बाद 17 मार्च 2025 को संशोधन किया गया और 21 मार्च को सिग्नेचर हुए. जिस समय सिग्नेचर हुए उस दिन गुरुग्राम स्थित AIPL ऑफिस में संजय कपूर के साथ दो गवाहों दिनेश अग्रवाल और नितिन शर्मा भी मौजूद थे. जबकि मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो जिस दिन यानी 17 मार्च को वसीयत में संशोधन किया गया, उस दिन वह अपने बेटे कियान के साथ गोवा में छुट्टियां एंजॉय कर रहे थे और 17 मार्च की शाम वह अपनी मां से दिल्ली मिलने पहुंचे थे.
गवाहों के बयान में नहीं है वसीयत साइन होने का जिक्र
आपको बता दें, दो गवाहों दिनेश अग्रवाल और नितिन शर्मा के बयान लिए गए और उन दोनों के बयान के अनुसार, गुरुग्राम में वसीयत साइन होने का कोई जिक्र नहीं है. ऐसे में बच्चों ने कहा कि ये साफ तौर पर जालसाजी है.
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