बॉलीवुड ने कई ऐतिहासिक और यादगार मूवीज रची हैं. जिसमें से एक मूवी ऐसी भी है जिसमें न तो भव्य सेट्स नजर आते हैं और न ही किसी आइकॉनिक कैरेक्टर की कहानी. फिर भी इस फिल्म के पन्ने के बिना इंडियन सिनेमा की किताब पूरी नहीं हो सकती. ये एक ऐसी फिल्म है जिसमें हीरोइन की मासूमियत, हीरो का जुनून एक निर्दोष सी मोहब्बत और दिल की रग रग को दुखाने वाला और आंखें नम करने वाला क्लाइमेक्स है. फिल्म तो पहले ही जज्बातों के कुछ अलग रंगों से सजी थी. लेकिन क्लाइमेक्स में हीरो के छोटे से इंप्रोवाइजेशन ने इसे अब तक का सबसे इमोशनल क्लाइमेक्स बना दिया.
Sridevi, Kamal Haasan and Leela Mishra in the classic, Sadma (1983)#Sridevi @ikamalhaasan #LeelaMishra pic.twitter.com/2ZDG2Fu9E1
— Movies N Memories (@BombayBasanti) October 10, 2018
कौन सी है ये फिल्म?
हम जिस फिल्म की बात कर रहे हैं उसका नाम है सदमा. 8 जुलाई 1983 में रिलीज हुई इस फिल्म में श्रीदेवी और कमल हासन नजर आए थे. लीला मिश्रा जैसे उम्दा कलाकारों ने फिल्म के एक एक सीन को और खास बनाया था. बालू महेंद्र की ये फिल्म एक ऐसी हसीन युवती की कहानी थी जो एक हादसे के बाद अपनी याददाश्त खो बैठती है. वो पांच साल की बच्ची बन जाती है. जो अपने रईस परिवार से दूर कमल हासन से जा मिलती है. उसे ही अपना सब कुछ मानने लगती है. उसकी देखरेख करते करते कमल हासन उसे चाहने लगता है. लेकिन क्लाइमेक्स में प्यार के नाम पर सिर्फ आंसू ही बचते हैं.
हीरो ने किया इंप्रोवाइजेशन
फिल्म का क्लाइमेक्स कुछ यूं है कि श्रीदेवी की याददाश्त वापस आ जाती है और वो कमल हासन को पहचान नहीं पाती. अपनी फैमिली के साथ वो ट्रेन में सवार होकर घर वापस लौटने वाली होती है. शुरुआत में इस एंड को एकदम प्लेन रखा था. स्क्रिप्ट के मुताबिक, श्रीदेवी ट्रेन में बैठकर जाती हैं और कमल हासन चुपचाप उन्हें देखते रहते हैं. लेकिन कमल हासन को लगा कि ये एंड बहुत ड्राई है. उन्होंने इसे इंप्रोवाइज करते हुए वैसे ही एक्ट करना शुरू कर दिया जैसे वो पूरी फिल्म में बच्ची बनी श्रीदेवी को बहलाने के लिए करते हैं. कभी हंसते हैं कभी उछल कूद करते हैं. लेकिन हर कोशिश नाकाम होती है और उनके हिस्से में बचती है आंखों की नमी. उनके इस अंदाज ने सदमा के क्लाइमेक्स को हमेशा हमेशा के लिए यादगार बना दिया.
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