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This Article is From Jul 30, 2025

दोस्ती पर बनी वो फिल्में, जिसमें किसी ने दोस्ती में दे दी जान तो कोई बना ढाल

'दोस्ती' शब्द सुनते ही जय और वीरू की तस्वीर आंखों के सामने आ जाती है. साल 1975 में रिलीज हुई फिल्म ‘शोले’ आज भी दोस्ती का पर्याय है. फिल्म इंडस्ट्री सिनेमा के जरिए दोस्त और दोस्ती की कहानी को बेहतरीन अंदाज में कहने में माहिर है.

दोस्ती पर बनी वो फिल्में, जिसमें किसी ने दोस्ती में दे दी जान तो कोई बना ढाल
इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे : किसी ने दोस्ती में दे दी जान तो कोई बना ढाल
नई दिल्ली:

'दोस्ती' शब्द सुनते ही जय और वीरू की तस्वीर आंखों के सामने आ जाती है. साल 1975 में रिलीज हुई फिल्म ‘शोले' आज भी दोस्ती का पर्याय है. फिल्म इंडस्ट्री सिनेमा के जरिए दोस्त और दोस्ती की कहानी को बेहतरीन अंदाज में कहने में माहिर है. इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे के मौके पर ऐसी फिल्मों पर डालते हैं एक नजर जहां दोस्ती में जान देने या मित्र की ढाल बनने की कहानियों को गढ़ा गया. बॉलीवुड ने ऐसी कई फिल्मों के जरिए दोस्ती के जज्बे को पर्दे पर उतारा है, जो हंसी, आंसुओं और बलिदान से भरी हैं.

साल 1975 में आई शोले की गिनती बॉलीवुड की सबसे शानदार फिल्मों में की जाती है, जिसमें जय (अमिताभ बच्चन) और वीरू (धर्मेंद्र) की दोस्ती की मिसाल है. ठाकुर बलदेव सिंह (संजीव कुमार) गब्बर सिंह को पकड़ने का जिम्मा इन दोनों जांबाजों को सौंपता है. इन दो दोस्तों की कहानी हंसी, रोमांच और बलिदान से भरी है. जब डाकुओं ने वीरू और उसकी प्रेमिका बसंती (हेमा मालिनी) को पकड़ लिया, तो जय ने अपनी जान देकर उन्हें बचा लिया.

साल 2001 में आई थी, 'दिल चाहता है' फरहान अख्तर की यह फिल्म आकाश (आमिर खान), समीर (सैफ अली खान) और सिद्धार्थ (अक्षय खन्ना) की दोस्ती की कहानी है. यह फिल्म आधुनिक दोस्ती के उतार-चढ़ाव, प्यार और जिंदगी के बदलाव को दिखाती है. दोस्तों के बीच मतभेद के बावजूद, वे एक-दूसरे के लिए हमेशा और हर हाल में खड़े रहते हैं.

साल 2003 में रिलीज हुई थी 'कल हो ना हो', यह फिल्म कई मायनों में खास थी, हालांकि, शाहरुख खान, सैफ अली खान और प्रीति जिंटा स्टारर यह फिल्म दोस्ती और प्यार का संगम है. अमन (शाहरुख) को पता है कि उसकी सांसे ज्यादा नहीं बची हैं, फिर भी वह अपनी दोस्त नैना (प्रीति) को खुश देखना चाहता है. वह नैना और रोहित (सैफ) को करीब लाता है, अपनी भावनाओं को छिपाकर. यह दोस्ती की कहानी को नए अंदाज में पेश करती है. 

मल्टीस्टारर फिल्म 'रंग दे बसंती' साल 2006 में आई थी. राकेश ओमप्रकाश मेहरा की यह फिल्म दोस्ती और देशभक्ति का संगम है. अभिनेता आमिर खान, सिद्धार्थ, शरमन जोशी, कुणाल कपूर और अतुल कुलकर्णी जैसे सितारों से सजी यह कहानी एक ब्रिटिश फिल्ममेकर के भारत आने और पांच दोस्तों को स्वतंत्रता सेनानियों की कहानी पर फिल्म बनाने के लिए प्रेरित करने की है. जब इनका एक दोस्त सिस्टम की गलतियों का शिकार होता है, तो ये दोस्त मिलकर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते हैं और अपनी जान तक कुर्बान कर देते हैं. यह फिल्म दोस्ती की गहराई को पर्दे पर पेश करती है.

दोस्ती की बात हो तो साल 2009 में आई '3 इडियट्स' को इग्नोर नहीं किया जा सकता. राजकुमार हिरानी की यह फिल्म रणछोड़दास (आमिर खान), राजू (शरमन जोशी) और फरहान (आर. माधवन) की कॉलेज दोस्ती की कहानी है. यह फिल्म न केवल एजुकेशन सिस्टम पर तंज कसती है, बल्कि दोस्ती के महत्व को भी खास अंदाज में दिखाती है. रणछोड़दास अपने दोस्तों को जीवन में सही रास्ता चुनने के लिए प्रेरित करता है. जब राजू मुश्किल में होता है, तो रणछोड़दास और फरहान उसकी मदद के लिए दौड़ पड़ते हैं. यह फिल्म कॉमेडी, प्रेरणा और दोस्ती का शानदार मिश्रण है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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