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नेपाली गाने की धुन से तैयार हुआ पंचम दा का ये गाना, 60 साल बाद भी मोहम्मद रफी की आवाज में देता है सुकून

करीब 60 साल पहले आया एक सुपरहिट हिंदी गाना आज भी लोगों की पसंद बना हुआ है. बहुत कम लोग जानते हैं कि इसकी धुन नेपाल के एक मशहूर गीत से प्रेरित थी. शानदार संगीत और मोहम्मद रफी की आवाज ने इसे ऐसा बनाया कि आज भी लोग इसे बड़े चाव से सुनते हैं.

नेपाली गाने की धुन से तैयार हुआ पंचम दा का ये गाना, 60 साल बाद भी मोहम्मद रफी की आवाज में देता है सुकून
60 साल बाद भी नहीं उतरा मोहम्मद रफी के इस गाने का खुमार
नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा में कई गाने आए और चले गए, लेकिन कुछ गानों का जादू ऐसा होता है जो पीढ़ियों तक लोगों के दिलों पर राज करता है. ऐसा ही एक गाना है 'दीवाना मुझसा नहीं'. जैसे ही इसकी धुन कानों में पड़ती है, पुराने दिनों की यादें ताजा हो जाती हैं. मोहम्मद रफी की दिल छू लेने वाली आवाज, शम्मी कपूर का शानदार अंदाज और पंचम दा का कमाल का संगीत इस गाने को आज भी खास बनाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस सुपरहिट गाने की धुन का कनेक्शन नेपाल से जुड़ा हुआ है.

जब नेपाली धुन बना ये बॉलीवुड हिट

साल 1966 में रिलीज हुई फिल्म 'तीसरी मंजिल' का गाना 'दीवाना मुझसा नहीं' उस दौर में हर किसी की जुबान पर चढ़ गया था. दिलचस्प बात ये है कि इस गाने की धुन नेपाल के बेहद लोकप्रिय गीत 'ए कान्छा मलाई सुनको तारा' से प्रेरित बताई जाती है. मूल नेपाली गाने को अरुणा लामा और अंबर गुरूंग ने अपनी आवाज दी थी. पंचम दा ने इस धुन को अपने अंदाज में सजाया और इसे हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार गानों में शामिल कर दिया.

रिलीज होते ही मच गया था तहलका

'तीसरी मंजिल' सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि उस दौर का बड़ा म्यूजिकल धमाका थी. फिल्म में शम्मी कपूर, आशा पारेख और हेलन की जोड़ी ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया. वहीं इसके गानों ने रिलीज होते ही धूम मचा दी थी. खास बात ये रही कि इस फिल्म ने आरडी बर्मन को रातों-रात स्टार म्यूजिक डायरेक्टर बना दिया. फिल्म का पूरा एल्बम लोगों की पहली पसंद बन गया था.

रफी साहब की आवाज ने गाने को बना दिया अमर

इस गाने में पंचम दा ने सैक्सोफोन, कीबोर्ड, बोंगो और वायलिन जैसे म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट्स का शानदार इस्तेमाल किया था. लेकिन असली जादू तब हुआ जब मोहम्मद रफी की आवाज इस धुन से जुड़ी. उनकी गायकी और शम्मी कपूर के जबरदस्त एक्सप्रेशंस ने इस गाने को एक अलग ही पहचान दे दी. यही वजह है कि करीब 60 साल बाद भी 'दीवाना मुझसा नहीं' सुनते ही फैंस आज भी उसी जोश और उत्साह में खो जाते हैं.

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सिनेमा की दुनिया में डूबे रहना पहली पसंद. टेलीविजन की दुनिया के लेटेस्ट अपडेट टिप्स पर रहते हैं. बॉलीवुड की खबरों पर तीखी नजर और गहन विश्लेषण. साल 201... और पढ़ें
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