मोहम्मद रफी बॉलीवुड के वो सिंगर हैं, जिनके गाने आज के दशक में भी फैंस के दिलों पर राज करते हैं. वहीं चांदनी रात में हो या दिन दोपहरी फैंस सुनते हैं. लेकिन क्या आप उनके 66 साल पुराने उस गाने के बारे में जानते हैं, जिसकी फिल्म तो ब्लैक एंड वाइट थी. लेकिन गाना कलरफुल में शूट किया गया था. वहीं आज भी इस गाने को पसंद किया जाता है. यह फिल्म गुरूदत्त और वहीदा रहमान की थी. हम बात कर रहे हैं चौदहवीं का चांद हो गाने की, जो 1960 में रिलीज हुई फिल्म चौदहवीं का चांद का है.
1960 में रिलीज हुई थी चौदहवीं का चांद
एम सादिक द्वारा निर्देशित चौदहवीं का चांद एक ब्लैक एंड वाइट फिल्म थी, जिसमें गुरु दत्त, वहीदा रहमान, रहमान, जॉनी वॉकर अहम किरदार में नजर आए थे. यह रोमांटिक ड्रामा फिल्म थीं, जो बॉक्स ऑफिस पर सफल साबित हुई थी. वहीं साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक थी. जबकि फिल्म कंपेनियन वेबसाइट द्वारा टॉप 100 बॉलीवुड एल्बमों में म्यूजिक एल्बम को 30वां स्थान मिला था. इसका टाइटल ट्रैक चौदहवीं का चांद काफी पॉपुलर हुआ.
Chaudhvin Ka Chand Ho.... Waheeda Rehman#waheedarehman #vintage #bollywoodflashback pic.twitter.com/tLEqLSmWQ9
— Movies N Memories (@BombayBasanti) August 7, 2022
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चौदहवीं का चांद था के इस सीन पर सेंसर बोर्ड ने उठाया था सवाल
1960 में रिलीज हुई चौदहवीं का चांद एक ब्लैक एंड फिल्म थी. IMdb के अनुसार, उन दिनों कलर फिल्मों की चर्चा चल रही थी. तब गुरु दत्त ने इस फिल्म के टाइटल सॉन्ग को कलर में दोबारा शूट करने का फैसला किया. लेकिन जब सेंसर बोर्ड ने दोबारा पास करने के लिए गुरु दत्त से एक सीन डिलीट करने के लिए कहा, जिसमें वहीदा रहमान उनकी तरफ देखती हैं तो उनकी आंखें लाल नजर आती हैं. गुरु दत्त ने इस पर आवाज उठाई और सेंसर बोर्ड पर सवाल उठाया, जिन्होंने यह कहा था कि इस सीन में वह बहुत सेंसुअस नजर आ रही हैं.
यूट्यूब पर मिले 7.7 मिलियन व्यूज
चौदहवीं का चांद एक सदाबहार गाना है, जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यूट्यूब पर इस गाने को 7.7 मिलियन व्यूज मिले हैं. वहीं इस गाने को 2026 में भी लोग सुन रहे हैं और कमेंट सेक्शन में तारीफ कर रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, वक्त चाहे कितना भी बदल जाए...लेकिन इस मधुर गीत की अहमियत कभी कम नहीं होगी ..इस गीत के सभी बोल हमें पल-पल अतीत की याद दिलाते रहेंगे. दूसरे यूजर ने लिखा, अचानक नींद खुल गई और ये गाना याद आया. तीसरे यूजर ने लिखा, सिंगर तो आते जाते रहेंगे लेकिन रफी साहब का कोई मुक़ाबला नही है।उनके जैसा सिंगर न कभी था और न कभी होगा. वो तो सदा के लिए अमर हो गए.
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