पंजाबी एक्ट्रेस नीरू बाजवा ने सोशल मीडिया पर दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने पर निराशा जाहिर की है. फिल्म को रिलीज होने के सिर्फ 2 दिन बाद ही हटा दिया गया था. नीरू ने दिलजीत के साथ कई फिल्मों में काम किया है. उन्होंने कहा कि दर्शकों को यह चुनने का हक है कि वे किसी फिल्म का समर्थन करना चाहते हैं या उसकी आलोचना करना चाहते हैं.
उन्होंने आगे कहा कि दर्शकों को यह जानने का हक है कि फिल्म को अचानक ओटीटी प्लेटफॉर्म से क्यों हटाया गया. नीरू ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि मैंने 'सतलुज' देखी, भावनाएं निश्चित रूप से जागृत हुईं. एक फिल्म मनोरंजन से कहीं बढ़कर है. यह उसके निर्माताओं की आवाज, उनका जुनून, उनका सच और बरसों की कड़ी मेहनत है. किसी के पास भी बिना जवाबदेही के उसे दबाने की ताकत नहीं होनी चाहिए.
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उन्होंने कहा कि लोग किसी फिल्म का समर्थन करें या उसकी आलोचना, यह उनका फैसला होना चाहिए. दर्शकों से यह विकल्प छीनना गलत है. हमें इसे देखने, खुद सोचने और यह तय करने का हक है कि हमारे लिए इसका क्या मतलब है. अगर 'सतलुज' को हटाया गया है तो जनता को सच्चाई जानने का हक है. हमें स्पष्टीकरण चाहिए, खामोशी नहीं. पारदर्शिता कोई विशेषाधिकार नहीं है. यह एक जिम्मेदारी है.

Photo Credit: Social media
उन्होंने कहा कि पंजाबी होने के नाते, उन्हें सवाल पूछने का हक है अगर उनकी मातृभूमि की कहानियों को उनसे छिपाया जाता है. अभिनेत्री ने कहा कि हम कुछ खास नहीं मांग रहे हैं. हम सच्चाई, निष्पक्षता और फिल्म को अनुभव करने और अपनी राय बनाने की आजादी मांग रहे हैं. हमारी आवाज मायने रखती है. हमारी कहानियां मायने रखती हैं और सच्चाई मायने रखती है.
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मंगलवार को नीरू ने एक और सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि उन्हें यह बहुत गलत लगा कि 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया, जबकि उन्हें फिल्म देखने का मौका भी नहीं मिला था. उन्होंने लिखा कि पंजाबी कलाकार के तौर पर मुझे गर्व है, लेकिन 'सतलुज' को हटाए जाने से निराशा महसूस हुई. हमारी संस्कृति और पहचान को दर्शाने वाली कहानियां देखे जाने के लायक हैं, दबाए जाने के लायक नहीं. यह फैसला हमारे समुदाय के लिए अन्यायपूर्ण और दिल तोड़ने वाला है. सेंसरशिप के खिलाफ लंबी लड़ाई के बाद, 'सतलुज' आखिरकार जी-5 पर रिलीज हुई. हालांकि, रिलीज के सिर्फ 2 दिन बाद ही भारत में फिल्म को हटा दिया गया.
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