भारतीय सिनेमा में 20वीं सदी के बेहतरीन एक्टर्स में हमेशा से नसीरुद्दीन शाह का नाम जरूर लिया जाता है. वह एक ऐसे अभिनेता है जिन्होंने बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक में अपने दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया जो हर एक्टर का सपना होता है, लेकिन सिनेमा के पर्दे पर एक्टिंग के सफर की शुरुआत उनकी इतनी आसान नहीं थी.
दिलीप कुमार से मिली थी नसीहत
एक समय ऐसा भी था जब उन्होंने अपने सपने को लेकर बड़े- बड़े एक्टर्स से नसीहतें मिलती थी. कोई उन्हें इस इंडस्ट्री से चले जाने के लिए कहता. कोई कुछ. इसी में उस सदी के मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार ने भी नसीरूद्दीन शाह को उनके स्ट्रगलिंग टाइम के दौरान सलाह दी, जिसमें उन्हें वापस घर जाकर पढ़ाई करने की सलाह मिली, हालांकि नसीर ने अपना हौसला नहीं टूटने दिया और अपने फैसले पर डटे रहे.
16 साल की उम्र में 7.50 रुपए से की थी एक्टिंग की शुरूआत
दरअसल, एक्टिंग का क्रीड़ा बचपन से ही उनके खून में बसा हुआ था. अपने इसी करियर को पूरा करने के लिए नसीरुद्दीन शाह ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (National School of Drama) का रुख किया. थियेटर में काम करते हुए ही उन्होंने फिल्मों में छोटे-मोटे काम करने शुरू किए. साल 1967 में उन्हें पहली बार फिल्म अमन में काम मिला. इस फिल्म में वह एक्स्ट्रा कलाकार के तौर पर नजर आए थे. इस छोटे से रोल के लिए उन्हें सिर्फ 7.50 रुपए मिले थे. उस समय वह सिर्फ 16 साल के थे.
घर जाकर पढ़ाई की मिली थी नसीरुद्दीन शाह को नसीहत
इतने कम पैसों में मुंबई में रहना तो दूर पेट पालना भी मुश्किल होता था. ऐसे में इसी संघर्ष के दौरान उनकी मुलाकात 20वीं सदी के सुपरस्टार दिलीप कुमार से हुई. उन्होंने उनसे फिल्म इंड्रस्ट्री में अपने कदम जमाने का तरीका पूछा, जिसपर दिलीप साहब के जवाब से उन्हें बेहद धक्का लगा. दरअसल उन्होंने उन्हें वापस घर जाकर पढ़ाई करने की नसीहत दी. उनकी इस नसीहत पर नसीरुद्दीन शाह ने अपनी रजामंदी नहीं दी लेकिन मन ही मन कुछ ठान लिया और वहीं रहकर शिद्दत से अपने पैशन को फॉलो करते रहे.
एक्टिंग को करियर बनाने से अब्बा थे नाराज
नसीरुद्दीन शाह उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले थे. उनके अब्बा को दिलीप साहब जाते थे, इस कारण वह नसीरुद्दीन शाह को भी बेहद मानते है. उनके मुंबई आने से उनके पिता अली मोहम्मद शाह बेहद नाराज थे. उनके पिता चाहते थे कि वह कोई सुरक्षित करियर चुनें, लेकिन नसीर ने अपने सपने को चुना. इसके बाद उन्होंने पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट में भी प्रशिक्षण लिया और अभिनय की बारीकियां सीखीं.
श्याम बेनेगल निशांत' मिली भारतीय सिनेमा में पहचान
दिलीप साहब की बात को दिल में दबाए लिए नसीरुद्दीन शाह ने खुद अपने सपने को पूरा करने के लिए दिन रात लगा दिए. जिसका परिणाम उन्हें साल 1975 में श्याम बेनेगल की फिल्म 'निशांत' से मिला. इसके बाद उन्होंने पीछे पलट कर नहीं देखा और 'आक्रोश', 'स्पर्श', 'मंडी', 'अर्ध सत्य', 'मिर्च मसाला' और 'जाने भी दो यारों' जैसी सुपहिट फिल्में उनके हिस्सें में आई. इसके अलावा कमर्शियल फिल्मों में भी अपनी पहचान बनाई, 'कर्मा', 'मोहरा', 'सरफरोश', 'इकबाल', 'ए वेडनेसडे' और 'द डर्टी पिक्चर' जैसी फिल्मों में उनके अलग-अलग किरदारों को दर्शकों ने खूब पसंद किया। खास बात यह रही कि वह हीरो, विलेन और गंभीर किरदार हर भूमिका में अपनी अलग छाप छोड़ते रहे.
यह भी पढ़ें: आमिर खान की हीरोइन, जिसने ऑस्कर तक का तय किया सफर, अब जी रही ऐसी जिंदगी, ग्लैमर की दुनिया से दूर अभी तक हैं अनमैरिड
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं