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मोहम्मद रफी का 66 साल पुराना गाना, जिसे लिखने वाले को झेलनी पड़ी जिल्लत, कहलाया कल्ट, आज भी सुनते है लवर 

शकील के लिखे बेहतरीन गीतों की बात करें तो उन्होंने 'चौदहवीं का चांद', 'प्यार किया तो डरना क्या', 'न जाओ सैंया छुड़ा के बैयां कसम तुम्हारी', 'हुस्नवाले तेरा जवाब नहीं' और 'सुहानी रात ढल चुकी' जैसे कई गीत लिखे. अपने लिखे गानों से शकील को काफी लोकप्रियता मिली.

मोहम्मद रफी का 66 साल पुराना गाना, जिसे लिखने वाले को झेलनी पड़ी जिल्लत, कहलाया कल्ट, आज भी सुनते है लवर 
मोहम्मद रफी का 66 साल पुराना गाना जिसे लिखने वाले को झेलनी पड़ी जिल्लत
नई दिल्ली:

प्रसिद्ध गीतकार और शायर शकील बदायूंनी का जन्म 3 अगस्त, 1916 को उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में हुआ था. इस वर्ष उनकी 110वीं जयंती है. हिंदी सिनेमा को उन्होंने कई ऐसे गीत दिए, जो आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं. 20 अगस्त, 1970 को मुंबई में उनका निधन हो गया था. हिंदी फिल्मों में कई यादगार गीत देने वाले शकील बदायूंनी का असली नाम शकील अहमद था, लेकिन बदायूं जिले के होने के कारण उन्होंने अपने उपनाम में 'बदायूंनी' लिखना शुरू कर दिया था. शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय पहुंचे. यहां पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली में सरकारी नौकरी शुरू कर दी. दिल्ली में रहने के दौरान ही वे मुशायरों में भी शिरकत करने लगे. वर्ष 1940 में उन्होंने सलमा से निकाह कर लिया। वर्ष 1944 में वे दिल्ली छोड़कर मुंबई आ गए.

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मायानगरी में आने के बाद शकील ने कई यादगार फिल्मी गीत लिखे. उन्होंने सिर्फ फिल्मी गीत ही नहीं लिखे, बल्कि कई भजनों को भी लिखा. उनका लिखा फिल्म 'बैजू बावरा' का भजन ‘मन तड़पत हरि दर्शन को आज....' लोगों के दिलों में आज भी रचा-बसा है. शकील बदायूंनी और नौशाद की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई शानदार गीत दिए.. उनको सर्वोत्तम गीतकार का फिल्म फेयर अवार्ड मिला था. उन्होंने 89 फिल्मों के लिए गीत लिखे. शकील का सिर्फ 53 वर्ष की आयु में निधन हो गया था.

शकील के लिखे बेहतरीन गीतों की बात करें तो उन्होंने 'चौदहवीं का चांद', 'प्यार किया तो डरना क्या', 'न जाओ सैंया छुड़ा के बैयां कसम तुम्हारी', 'हुस्नवाले तेरा जवाब नहीं' और 'सुहानी रात ढल चुकी' जैसे कई गीत लिखे. अपने लिखे गानों से शकील को काफी लोकप्रियता मिली.

नौशाद के साथ शकील ने पहली बार फिल्म 'दर्द' के लिए लिखे गीत काफी सुपरहिट रहा. इसके बाद नौशाद ने 'दर्द', 'दीदार', 'बैजू बावरा', 'मदर इंडिया', 'मुगल-ए-आजम', 'गंगा जमुना' और 'मेरे मेहबूब' समेत कई फिल्मों के लिए बदायूंनी से गाने लिखवाए.

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क्या था मामला 
निदा फाजली की किताब चेहरे में इस घटना की जिक्र है. ग्वालियर के मुशायरे में देशभर के नामचीन शायर पहुंचे थे. वहां शकील बदायूंनी थे. शकील ने वहां एक शेर पढ़ा. जिसे सुनकर उस दौर के बड़े शायर नातिक चिढ गए और उन्होंने सबके सामने शकील को डांटा. उन्होंने कहा कि पैसे के चक्कर में शकील कायदे तहजीब भूल गए. उन्होंने कहा कि चौदहवीं का चांद हो या आफताब हो गाने में उन्होंने  तुम शब्द गायब कर दिया है. इससे छंद का तालमेल बिगड़ गया है. 

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