अभी हाल में हमने आपको संजीव कुमार और जया बच्चन के एक हिट गाने के बारे में बताया था. ये गाना था 'पल्लो लटके' जिसे फिल्म में काफी पसंद किया गया और आज तक सुना और गाया जाता है. असल में ये हिंदी नहीं बल्कि राजस्थान की मिट्टी से आया था. इसी मिट्टी से आए एक गाने ने मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म पर भी चार चांद लगाए थे. मिथुन चक्रवर्ती की ये फिल्म थी साल 1999 में आई 'गंगा की कसम'. इस फिल्म में जो राजस्थानी गाना इस्तेमाल किया गया वो था 'बन्ना रे बाग में झूल्या घाल्या'
किस मौसम से जुड़े हैं इस गाने के तार?
'बन्ना रे बाग में झूला डाल्या' असल में रजस्थान की बन्ना-बन्नी गीतों में से एक है जिसे सावन के महीने में गाया जाता है. बन्ना शब्द का मतलब दूल्हा और बन्नी का मतलब दुल्हन होता है. इस गाने में बन्नी यानी दुल्हन अपने दूल्हे से कहती है कि वो बाग में झूला डाल दे क्योंकि सावन का मौसम आ गया है. इस गाने को गांव में सावन और त्योहार के मौकों पर महिलाएं साथ में गाती है. तीज के त्योहार पर भी गाने का खास महत्व होता है.
गंगा की कसम में खूब पसंद किया गया ये गाना
साल 1999 में मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म 'गंगा मां की कमस' में इस गाने को काफी सराहा गया. इस गाने में मिथुन और दीप्ती भटनागर राजस्थानी लुक में डांस करते नजर आए थे. अब बात करें गानें में जान डालने वाली आवाजों की तो इसे जसपिंदर नरुला और सुखविंदर सिंह ने मिलकर गाया था. इस गाने का म्यूजिक बप्पी लहरी ने दिया था. इस गाने को खास बनाता है इसका अंदाज. दरअसल इसे बड़े ही प्यारे बातचीत और नोंक-झोंक भरे लहजे में बनाया गया है. वहीं अगर संगीत की बात करें तो ढोलक की थाप पर ये गीत बहुत खूब जचता है.
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