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शाहिद-करीना के मौजा ही मौजा गाने में पंजाबी ही नहीं इस भाषा में भी हैं बोल, 19 साल बाद फिर सुनकर भी नहीं होगा यकीन

'मौजा ही मौजा' गाने पर पूरी दुनिया झूमती है, लेकिन इसकी शुरुआत में सुनाई देने वाले बोल पंजाबी नहीं हैं. ये असम के एक पुराने लोकगीत से लिए गए हैं. जानिए इस सुपरहिट गाने के पीछे छिपी दिलचस्प कहानी.

शाहिद-करीना के मौजा ही मौजा गाने में पंजाबी ही नहीं इस भाषा में भी हैं बोल, 19 साल बाद फिर सुनकर भी नहीं होगा यकीन
मौजा ही मौजा गाने के पहले बोल की दिलचस्प कहानी
नई दिल्ली:

कुछ गाने सिर्फ हिट नहीं होते, वक्त के साथ यादों का हिस्सा बन जाते हैं. जैसे ही उनकी धुन कानों में पड़ती है, पैर अपने आप थिरकने लगते हैं और चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. लेकिन कई बार ऐसे गानों में ऐसी बातें छिपी होती हैं, जिन पर हमारा कभी ध्यान ही नहीं जाता. फिल्म जब वी मेट का गाना 'मौजा ही मौजा' भी ऐसा ही एक गाना है. 19 साल बाद भी शादी हो, डीजे नाइट हो या दोस्तों की पार्टी, ये गाना बजते ही पूरा माहौल बदल जाता है. लेकिन क्या आपने कभी इसके पहले कुछ सेकेंड ध्यान से सुने हैं? ज्यादातर लोगों को लगता है कि शुरुआत में सुनाई देने वाले बोल पंजाबी हैं या फिर सिर्फ म्यूजिक को मजेदार बनाने के लिए जोड़े गए हैं. लेकिन असली कहानी इससे बिल्कुल अलग है. इन बोलों का रिश्ता असम के एक पुराने लोकगीत से है, जिसे जानकर शायद अगली बार आप ये गाना और भी दिलचस्प तरीके से सुनेंगे.

पार्टी सॉन्ग में छिपा है असम का रंग

साल 2007 में रिलीज हुआ 'मौजा ही मौजा' देखते ही देखते हर पार्टी की जान बन गया. आज भी ये गाना बजते ही लोग डांस फ्लोर पर पहुंच जाते हैं. लेकिन इसकी शुरुआत में जो शब्द सुनाई देते हैं, वो न हिंदी हैं और न पंजाबी. ये असम के एक पुराने लोकगीत से लिए गए हैं. संगीतकार प्रीतम ने इन बोलों को गाने में इस तरह इस्तेमाल किया कि लोगों को ये अलग भी लगा और याद भी रह गया. गाने के बोल हैं- "आली काटी जाली दिम, बोर पीरा पारी दिम ताते बोही बोही रोड दे, रोडाली ए रोड दे, ताते बोही बोही रोड दे"

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आखिर इन बोलों का मतलब क्या है

अगर आपको लगता था कि इन शब्दों का मतलब भी सिर्फ मौज-मस्ती है, तो ऐसा नहीं है. ये एक प्यारा-सा बच्चों का लोकगीत है. इसमें बच्चे सूरज से कहते हैं कि बादलों के पीछे मत छिपो, बाहर आ जाओ. हम तुम्हारे लिए रास्ता साफ करेंगे, तुम्हारे बैठने की जगह भी तैयार करेंगे, बस हमें अच्छी धूप दे दो. यही वजह है कि ये बोल सुनने में जितने अलग लगते हैं, उनका मतलब उतना ही प्यारा है. संगीतकार प्रीतम और असमिया म्यूजिक अरेंजर ध्रुवज्योति फुकन ने इसे मिक्स किया था. हालांकि प्रीतम को शुरू में नहीं पता था कि ये असमिया है, लेकिन बाद में इसे गाने में शामिल कर दिया गया था.

कब गाया जाता है ये गीत

असम के कई गांवों में बच्चे ये गीत तब गाते हैं, जब कई दिनों तक लगातार बारिश होती रहती है और वे बाहर जाकर खेल नहीं पाते. धूप निकलने की उम्मीद में बच्चे मिलकर ये गीत गाते हैं. यानी जिस गाने पर आज पूरी दुनिया झूमती है, उसके पहले बोल बच्चों की एक मासूम दुआ से जुड़े हुए हैं.

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