हिंदी फिल्मों के लिए सिंगर सुनिधि चौहान ने रोमांटिक से लेकर इमोशनल समेत कई तरह के गाने गाए और अलग पहचान बनाई. इस पहचान के पीछे उनका एक लंबा सफर रहा है. यह सफर उस समय शुरू हो गया था, जब वह महज 5 साल की थी. इस उम्र में उन्हें मंच पर जाने का मतलब भी ठीक से पता नहीं था. सुनिधि चौहान का जन्म 14 अगस्त 1983 को नई दिल्ली में हुआ था. उनके जन्म का नाम निधि चौहान था. उनके पिता थिएटर से जुड़े थे और बचपन से ही सुनिधि को संगीत का माहौल मिला. करीब चार-पांच साल की उम्र में वह स्थानीय कार्यक्रमों और छोटे मंचों पर गाने लगी थीं. सुनिधि ने एक इंटरव्यू में बताया था कि बचपन में वह मंच के पीछे खड़ी रहती थीं और उनके पिता इशारा करके स्टेज पर भेजते थे.
संगीतकार कल्याणजी से मुलाकात
बचपन में ही उनकी प्रतिभा को पहचान लिया गया था. जब वह करीब 11 साल की हुईं तो परिवार दिल्ली से मुंबई आ गया. वहां उनकी मुलाकात मशहूर संगीतकार कल्याणजी से हुई और वह उनकी संगीत अकादमी से जुड़ गईं. बाद में वह कल्याणजी-आनंदजी के बच्चों के ग्रुप 'लिटिल वंडर्स' की प्रमुख गायिका बन गईं.
उन्हें कम उम्र में ही फिल्मों में गाने का मौका भी मिला. 1996 में फिल्म 'शस्त्र' के गाने 'लड़की दीवानी देखो' से उनका फिल्मी सफर शुरू हुआ. उसी साल उन्होंने दूरदर्शन के सिंगिंग शो 'मेरी आवाज सुनो' में हिस्सा लिया और जीत हासिल की. उस समय वह महज 13 साल की थीं. इस प्रतियोगिता की ट्रॉफी उन्हें लता मंगेशकर ने दी थी. सुनिधि ने बाद में बताया कि वह लता मंगेशकर को अपना आदर्श मानती थीं और उस दिन उनके सामने गाते समय बहुत घबरा गई थीं.
इस गाने से मिली पहचान
फिल्मों में शुरुआत तो जल्दी हो गई थी, लेकिन बड़ा नाम बनने में कुछ साल लगे. 1999 में फिल्म 'मस्त' का गाना 'रुकी रुकी सी जिंदगी' उनकी पहचान का बड़ा कारण बना. इसके बाद 'फिजा' का 'महबूब मेरे' आया और फिर 'धूम' का 'धूम मचाले', 'ओमकारा' का 'बीड़ी', 'डॉन' का 'ये मेरा दिल', 'फैशन' का 'देशी गर्ल', 'तीस मार खान' का 'शीला की जवानी' और 'धूम 3' का 'कमली' जैसे गानों ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया.
लेकिन सुनिधि के सफर में एक ऐसा दौर भी आया जब उनकी आवाज को लेकर उन्हें काफी बातें सुननी पड़ीं. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कुछ संगीतकार उनकी आवाज को 'मर्दाना' कहते थे. उन्हें रोमांटिक गाने देने से भी मना किया गया और एक समय वह खास तरह के गीत या आइटम गानों तक सीमित कर दी गई थीं. सुनिधि ने बताया कि संगीतकार अनु मलिक ने ऐसे समय में उनका साथ दिया और उन्हें अलग तरह के गाने दिलाने में मदद की. बाद में यही दमदार आवाज उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई.
सुनिधी चौहान की शादी
निजी जिंदगी में भी सुनिधि का सफर आसान नहीं रहा. 2002 में 18 साल की उम्र में उन्होंने कोरियोग्राफर और निर्देशक बॉबी खान से शादी की. यह शादी करीब एक साल ही चली और दोनों अलग हो गए. उस समय उनके परिवार के साथ भी रिश्ते खराब हुए थे. तलाक के बाद उन्हें आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने फिर अपने काम पर ध्यान दिया और धीरे-धीरे करियर को नई ऊंचाई दी. बाद में उन्होंने संगीतकार हितेश सोनिक से शादी की. दोनों का एक बेटा है.
सुनिधि को उनके काम के लिए कई बड़े पुरस्कार मिले हैं. उन्हें फिल्म 'मस्त' के लिए आर.डी. बर्मन अवॉर्ड मिला. इसके बाद 'बीड़ी' के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का पुरस्कार मिला और 'शीला की जवानी' के लिए भी उन्होंने फिल्मफेयर जीता. उनके नाम तीन फिल्मफेयर पुरस्कार और फिल्मफेयर अवॉर्ड साउथ सहित कई सम्मान दर्ज हैं.
सुनिधि ने फिल्मों के साथ-साथ छोटे पर्दे के लिए भी काम किया और कई सिंगिंग रियलिटी शो में जज बनीं. हालांकि बाद में उन्होंने इस काम से दूरी बना ली. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उन्हें लगा कि रियलिटी शो का माहौल अब उनके लिए सही जगह नहीं है. वह उस जगह से खुद को जुड़ा हुआ महसूस नहीं करतीं.
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