कैंसर से जंग जीतना आसान नहीं होता. वहीं जब आपको डॉक्टर यह कह दे कि आपके पास जिंदगी जीने के लिए केवल 5 साल हैं तो यह जंग जीतने की उम्मीद भी टूटी सी लगने लगती है. लेकिन कसूर फिल्म की एक्ट्रेस लीसा रे ने जिंदगी से हार नहीं मानी. आज वह कैंसर से जंग जीत चुकी हैं. दरअसल, हाल ही में पूर्व मिस इंडिया अदिति गोवात्रिकर के साथ बातचीत में लीसा रे ने 2009 में मल्टीपल मायलोमा डायगनॉज होने के दिनों को याद किया. लीजा रे अपने संघर्ष के दिनों को याद किया और अपनी आपबीती बताई. लीसा रे को 'आफरीन आफरीन गर्ल' के नाम से भी पहचाना जाता है. वे 1996 में नुसरत फतेह अली खान के गाने में नजर आई थीं.
लीसा रे ने कैंसर की जंग को किया याद
लीसा रे ने कहा, उन्होंने याद करते हुए कहा, “अंदर से एक गहरी समझ या आवाज आ रही थी, जो कह रही थी, ‘सब ठीक हो जाएगा. तुम इससे उबर जाओगी. यह आसान नहीं होगा, लेकिन तुम इससे निकल आओगी.' अंदर से मुझे एहसास हुआ कि यह एक ऐसी चीज थी, जिसका मुझे सामना करना था और जिससे गुजरना था. यह उन सभी चीजों से जुड़ा था, जो पहले हुई थीं.”
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लीसा रे ने कहा- भगवान मुझे मजबूर कर रहे हों
आगे उन्होंने कहा, "कैंसर मेरे बोन मैरो में बहुत गहराई तक फैला हुआ था. यह फिजिकली सबसे गहरी जगह था. मैं अपनी जिंदगी नहीं जी रही थी. मैं अपनी ऑथेंटिक लाइफ नहीं जी रही थी. मैंने अपने अलग-अलग रूपों को एक साथ नहीं जोड़ा था. ऐसा लगा जैसे जिंदगी, ब्रह्मांड और भगवान मुझे मजबूर कर रहे हों. अब समय आ गया है कि मैं बिना किसी डर और अपनी आवाज से समझौता किए, उस काम को करूं, जिसके लिए मैं बनी हूं और जो मैं रियल में हूं. जब कर्म पुराना हो जाता है तो इसका मतलब है कि वह फलने-फूलने या फल देने के लिए तैयार है. इसका मतलब यह नहीं है कि यह कोई सुखद चीज है, बल्कि इसका मतलब है कि आप उसे संभालने और उसका सामना करने के लिए तैयार हैं."
लीजा ने आगे कहा- “मुझे लगभग शरीर से अलग होने जैसा अनुभव हुआ, जहां सचमुच मुझे लगा कि मैं अपनी बॉडी से बाहर चली गई हूं. और महसूस कर रही हूं कि ‘ठीक है, सब ठीक है. मैं इससे उबर जाऊंगी'. मेरा मानना है कि हमारा एक ‘हायर सेल्फ' होता है, जिसने इस लाइफ में आने से पहले ही एक तरह का समझौता किया होता है. मेरा मानना है कि मेरे ‘हायर सेल्फ' ने इस खास अनुभव से गुजरने और उससे बाहर निकलने का समझौता किया था.”
लीसा रे के बारे में
एक्ट्रेस लीसा रे एक मॉडल और राइटर भी हैं, जिन्होंने 1994 में एक छोटे से रोल में डेब्यू किया. जबकि असली डेब्यू 2001 में कसूर से किया, जिसमें वह आफताब शिवदसानी के साथ स्क्रीन शेयर करते हुए नजर आईं. इसके बाद 2005 में उन्होंने दीपा मेहता की ऑस्कर नॉमिनेटेड फिल्म वॉटर में नजर आईं. हालांकि बीमारी के बाद वह कम प्रोज्क्टस का हिस्सा रही हैं.
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