सुकेश चंद्रशेखर की तरफ से लगातार आ रहे ये 'पब्लिक लव लेटर्स' और बढ़ा-चढ़ाकर किए जा रहे दावे अब सिर्फ एक तमाशा नहीं रहे, बल्कि सीधे तौर पर हैरेसमेंट (परेशानी) का रूप ले चुके हैं. इन हरकतों की वजह से एक्ट्रेस जैकलिन फर्नांडीस को जबरदस्ती एक ऐसी कहानी में घसीटा जा रहा है, जिससे उन्होंने हमेशा खुद को दूर रखा है. फ्रांस के अंगूर के बागों और लग्जरी याट्स से लेकर प्राइवेट जेट, लिली-ट्यूलिप के गार्डन और बेवर्ली हिल्स में आलीशान बंगले तक, सुकेश की ये बातें हकीकत कम और किसी काल्पनिक कहानी (फेंटेसी) जैसी ज्यादा लगती हैं. सबसे जरूरी बात यह है कि इन दावों को साबित करने के लिए आज तक कोई पुख्ता सबूत सामने नहीं आया है. न तो कोई मालिकाना हक के कागज, न ही कोई फाइनेंशियल रिकॉर्ड या किसी स्वतंत्र सोर्स से इसकी पुष्टि हुई है. सार्वजनिक तौर पर बार-बार दिए जा रहे इन बयानों का मकसद सिर्फ इतना लगता है कि जैकलिन का नाम किसी न किसी तरह विवादों से जुड़ा रहे.
यही वो जगह है, जहां असली नुकसान होता है. किसी भी एक्टर की इमेज सालों की मेहनत, काम और दर्शकों के भरोसे से बनती है. जैकलिन फर्नांडीस का नाम बार-बार बिना किसी सबूत वाली बेहिसाब दौलत और तोहफों की कहानियों से जोड़ना, उनके प्रोफेशनल काम से ध्यान भटकाकर सिर्फ सनसनीखेज अटकलों पर ले आता है. फिल्म इंडस्ट्री जैसी जगह में, जो पूरी तरह से लोगों के नजरिए पर चलती है, इस तरह की कहानियों के बहुत बुरे और लंबे समय तक रहने वाले नतीजे हो सकते हैं.
सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि इस पूरी स्थिति में उनके पास कोई कंट्रोल ही नहीं बचा है. जैकलिन ने न तो इन बयानों का कभी समर्थन किया है और न ही इनके फैलने से उन्हें कोई फायदा हो रहा है. इसके बावजूद, उन्हें जबरदस्ती एक ऐसी कहानी का मुख्य किरदार बना दिया गया है जिसे वो कंट्रोल नहीं करतीं. हर नई चिट्ठी या दावा फिर से अटकलों को हवा दे देता है, जिसका सीधा असर उनके ब्रांड्स, लोगों के बीच उनकी साख ( क्रेडिबिलिटी) और उनकी निजी गरिमा पर पड़ता है.
किसी भी बिना सबूत वाले दावे को 'रोमांस' का रंग देना या उसे बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना असल में उस हैरेसमेंट (परेशानी) को बढ़ावा देना है, जो प्यार का मुखौटा पहनकर किया जा रहा है. यह कोई प्रेम कहानी नहीं है, बल्कि यह एक सबक है कि कैसे किसी की सनक का इस्तेमाल एक महिला की पब्लिक इमेज को खराब करने के लिए किया जा सकता है. जब तक कुछ साबित न हो जाए, इन दावों को सिर्फ शक की नजर से ही देखा जाना चाहिए. जैकलिन फर्नांडीस अपनी मेहनत और अपने काम के दम पर अपनी पहचान की हकदार हैं, न कि उन बिना सिर-पैर की कहानियों के आधार पर जो उन पर जबरदस्ती थोपी जा रही हैं.
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