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विवादों में फंसने के बाद बैन हुई पहली फिल्म, फिर जीता 3 नेशनल अवार्ड, रिटायरमेंट की उम्र में इस एक्ट्रेस ने दी ब्लॉकबस्टर

आज उस एक्ट्रेस की बात कर रहे हैं जिन्होंने रिटायरमेंट की उम्र में ब्लॉकबस्टर फिल्में दी और अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया. तीन नेशनल अवार्ड अपने नाम करने वाली इस अभिनेत्री के करियर की शुरुआत ही विवाद से हुई थी. हम बात कर रहे हैं बालिका बहू की दादी सुरेखा सीकरी की.

विवादों में फंसने के बाद बैन हुई पहली फिल्म, फिर जीता 3 नेशनल अवार्ड, रिटायरमेंट की उम्र में इस एक्ट्रेस ने दी ब्लॉकबस्टर
इस एक्ट्रेस ने रिटायरमेंट की उम्र में दी ब्लॉकबस्टर
नई दिल्ली:

बॉलीवुड की वो पावरहाउस परफॉर्मर जिन्होंने सिनेमा और टीवी दोनों पर ही अपनी दमदार परफॉर्मेंस से दर्शकों की तालियां और क्रिटिक्स की तारीफ दोनों बटोरी. हम आज उस एक्ट्रेस की बात कर रहे हैं जिन्होंने रिटायरमेंट की उम्र में ब्लॉकबस्टर फिल्में दी और अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया. तीन नेशनल अवार्ड अपने नाम करने वाली इस अभिनेत्री के करियर की शुरुआत ही विवाद से हुई थी. हम बात कर रहे हैं बालिका बहू की दादी सुरेखा सीकरी की.

पहली फिल्म विवादों में फंसी

सुरेखा का जन्म 1945 में नई दिल्ली में हुआ था. उन्होंने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत 'किस्सा कुर्सी का' से की थी, जो एक पॉलिटिकल सटायर थी. शबाना आजमी इस फिल्म में लीड रोल में थीं. यह फिल्म 1975 में स्क्रीन पर आने वाली थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि इसकी ज्वलंत कहानी ने विवाद खड़ा कर दिया था. आखिरकार 1979 में एक कानूनी लड़ाई के बाद फिल्म को रिलीज किया गया.

मिला नेशनल अवार्ड

उन्होंने अपनी अगली बड़ी रिलीज़ तमस से सबका ध्यान खींचा और गोविंद निहलानी की क्लासिक फिल्म में अपने काम के लिए 'बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस' का नेशनल अवॉर्ड जीता. वह फिल्म सलीम लंगड़े पे मत रो का भी हिस्सा थीं, जिसे एक कल्ट का स्टेटस हासिल हुआ. इसके बाद उन्होंने परिणीति, लिटिल बुद्धा और सरफ़रोश जैसी फिल्मों से फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह पक्की की.

1994 में रिलीज़ हुई मम्मो उनके लिए गेमचेंजर साबित हुई. इस फ़िल्म को श्याम बेनेगल ने डायरेक्ट किया था. फिल्म की कहानी एक मुश्किल परिवार के इर्द गिर्द घूमती है. सुरेखा ने फिल्म में अपने काम के लिए अपना दूसरा नेशनल अवॉर्ड जीता, जिससे उनकी कामयाबी में एक और उपलब्धि जुड़ गई.

टीवी से मिली घर-घर में पहचान

टीवी सीरियल बालिका वधू में 'दादीसा' के रोल के लिए उन्हें खूब तारीफ मिली. साथ ही वह घर-घर में पहचानी जाने लगीं. यह शो 2008 से 2016 के बीच टीवी की दुनिया में छाया रहा. शो में अविका गौर ने लीड रोल में थीं. इसके अलावा उन्होंने महाकुंभ, परदेस में है मेरा दिल और एक था राजा एक थी रानी जैसे कई अन्य शोज में भी काम किया.

सिनेमा में दूसरी पारी रही हिट

2018 में रिलीज हुई फिल्म बधाई हो के साथ सुरेखा ने धमाकेदार वापसी की. एक्ट्रेस को बहुत अच्छे रिव्यू मिले और अपने काम के लिए उन्हें 'बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस' का तीसरा नेशनल अवॉर्ड मिला. उन्हें आखिरी बार फिल्म घोस्ट स्टोरीज में देखा गया था. 76 साल की उम्र में 16 जुलाई 2021 को उनका निधन हो गया.

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