'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है और 150 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है. इसी बीच फिल्म के लेखक-निर्देशक-निर्माता विशाल चतुर्वेदी ने खुलासा किया है कि उन्होंने नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित इस फिल्म की कहानी लिखने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया था. उन्होंने बताया कि कहानी लिखते समय उन्होंने खुद को पूरी तरह डिजिटल दुनिया से दूर कर लिया था. विशाल चतुर्वेदी ने कहा, 'मैंने अपने कमरे से सभी डिजिटल डिवाइस हटा दिए थे. न सिर्फ फिल्म की पूरी कहानी, बल्कि हर चीज मैंने पेन और कागज की मदद से लिखी. बाद में उन पन्नों की तस्वीरें अपने सहायकों को भेजता था और वे उन्हें डिजिटल फॉर्मेट में टाइप करते थे. इस तरह बिना किसी रुकावट के मुझे कहानी पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली.'
इसके अलावा लेखक-निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने यह भी बताया कि शुरुआत से ही उनके मन में इस विषय पर फिल्म बनाने का विचार था और उन्होंने इसके लिए काफी रिसर्च भी की थी. इसके लिए उन्होंने अपने निर्माताओं का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने उन्हें बिना किसी जल्दबाजी के अपनी रचनात्मक प्रक्रिया के अनुसार काम करने की पूरी आजादी दी.
विशाल चतुर्वेदी कहते हैं, 'दिलचस्प बात यह है कि पूरी कहानी तैयार होने में ज्यादा समय नहीं लगा, लेकिन फिल्म के पहले दृश्य को लिखने में मुझे करीब 45 दिन लग गए. दरअसल पहला दृश्य मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि वही पूरी कहानी की दिशा तय करता है और एक बार पहला दृश्य तय हो गया तो बाकी कहानी तेजी से आगे बढ़ती है. इसी तरह पहला दृश्य मिलने के बाद बाकी कहानी अपने आप बनने लगी और मैंने पूरी स्क्रिप्ट सिर्फ 15 से 20 दिनों में पूरी कर ली.'
फिलहाल 'हनुमान अंश' के पीछे विशाल चतुर्वेदी की यह मेहनत और समर्पण दर्शाता है कि उन्होंने इस कहानी को कितनी गंभीरता और श्रद्धा के साथ लिखा. सच कहें तो उनके लिए यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और प्रेरणा की कहानी को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास था. यही वजह है कि हाथों से लिखे नोट्स से शुरू हुई यह यात्रा आज साल की सबसे बड़ी सफल फिल्मों में शामिल हो चुकी है.
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