बॉलीवुड एक्टर जैकी श्रॉफ ने भारतीय सिनेमा के महान दूरदर्शी और मशहूर फिल्ममेकर-एक्टर गुरु दत्त को उनकी 101वीं जयंती पर श्रद्धांजलि दी. जैकी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर गुरु दत्त की कुछ यादगार ब्लैक-एंड-व्हाइट तस्वीरों का एक कोलाज शेयर किया. पोस्ट में लिखा, "गुरु दत्त जी को उनकी जयंती पर याद करते हुए,"साथ ही हाथ जोड़ने वाला इमोजी और हैशटैग 'गुरुदत्त' भी था. इस मौके पर फैंस को भी गुरु दत्त के उन गानों की याद आई, जिसे आज दशकों बाद भी फैंस याद करते हैं. इन्हीं में से एक है वो गाना, जिसका रिमिक्स वर्जन आज भी छाया हुआ है. वहीं गुरु दत्त की पत्नी गीता दत्त ने आवाज दी थी.
बाबूजी धीरे चलना का रिमिक्स वर्जन है पॉपुलर
गुरु दत्त का गाना बाबूजी धीरे चलना फिल्म 1954 में आई आर पार का गाना है. IMDb के अनुसार, कैलेमिटी क्रू ने 'बाबू दी झेरे चैना' नाम का एक इंटरनेशनल रीमिक्स बनाया था. यह कैलेमिटी क्रू (पॉल रसेल) के एल्बम 'नागरान' का हिस्सा था. इसके अलावा, 'सलाम-ए-इश्क' फिल्म में 'बाबूजी धीरे चलना' का एक रीमिक्स वर्जन भी था. 'बाबूजी धीरे चलना' का रीमिक्स 'द बारटेंडर' ने तैयार किया था. 'द बारटेंडर' माइकी मैक्लीरी के प्रोजेक्ट्स में से एक है, जिसमें वे बॉलीवुड के क्लासिक गानों को आज के दौर के अंदाज और नए एहसास के साथ पेश करते हैं. इस गाने को सागरिका मुखर्जी ने गाया था और यह 'द बारटेंडर' के पहले एल्बम, 'क्लासिक बॉलीवुड: शेकन, नॉट स्टिरड' में शामिल है.
गुरु दत्त की फिल्मों के पॉपुलर हुए गाने
गुरु दत्त की फिल्मों ने दर्शकों को हिंदी सिनेमा के कुछ सबसे यादगार गाने जैसे 'जाने वो कैसे लोग थे', 'ये दुनिया अगर मिल भी जाए', 'वक्त ने किया क्या हसीन सितम', 'चौदहवीं का चांद हो' और 'बाबूजी धीरे चलना' भी दिए. इन सदाबहार धुनों को एस.डी. बर्मन, ओ.पी. नय्यर और रवि जैसे उस्तादों ने कंपोज किया था और मोहम्मद रफी, गीता दत्त और हेमंत कुमार जैसे दिग्गजों ने गाया था.
गुरु दत्त की पर्सनल लाइफ
पर्सनल लाइफ की बात करें तो गुरु दत्त ने 1953 में मशहूर प्लेबैक सिंगर गीता दत्त से शादी की थी और उनके तीन बच्चे थे. खबरों के मुताबिक बाद में उनके रिश्ते में उतार-चढ़ाव आए, जबकि एक्ट्रेस वहीदा रहमान के साथ उनका करीबी प्रोफेशनल रिश्ता हिंदी सिनेमा में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहा. 39 साल की उम्र में 10 अक्टूबर, 1964 को गुरु दत्त का निधन हो गया. उनकी मौत शराब और नींद की गोलियों के प्रभाव से हुई मानी गई.
गुरुदत्त की बेहतरीन फिल्में
महान एक्टर गुरु दत्त का जन्म 9 जुलाई, 1925 को वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण के रूप में हुआ था. गुरु दत्त ने 1951 में 'बाजी' फिल्म से बतौर डायरेक्टर अपना करियर शुरू किया. इसके बाद उन्होंने कई सदाबहार क्लासिक फिल्में दीं, जिनमें 'आर-पार', 'मिस्टर एंड मिसेज '55', 'सीआईडी', 'प्यासा', 'कागज के फूल', 'चौदहवीं का चांद' और 'साहिब बीबी और गुलाम' शामिल हैं. उनकी 'प्यासा' और 'कागज के फूल' जैसी फिल्में रिलीज के समय तो बहुत बड़ी कमर्शियल हिट नहीं रहीं, लेकिन बाद में भारतीय सिनेमा की सबसे बेहतरीन फिल्मों में गिनी जाने लगीं.
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