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Gulzar Romantic Shayari: 'शाम से आँख में नमी सी है, आज फिर आप की कमी सी है', इश्क की गहराई में डुबोकर रख देने वाली गुलजार की इश्किया शायरी

Gulzar Shayari: वैलेंटाइन्स डे पर जब दिल की बात लफ्जों में ढलने से रह जाए, तब गुलजार की शायरी पर सवार होकर अपने दिल की बात तो कही ही जा सकती है, किसे दिल की गहराइयों में भी बखूबी उतरा जा सकता है.

Gulzar Romantic Shayari: 'शाम से आँख में नमी सी है, आज फिर आप की कमी सी है', इश्क की गहराई में डुबोकर रख देने वाली गुलजार की इश्किया शायरी
Gulzar Shayari: गुलजार की रोमांटिक शायरी
नई दिल्ली:

वैसे तो इश्क का कोई मौसम नहीं होता, फिर भी नया दौर है और नए दौर की नई बातें हैं. इन्हीं बातों में आता है 14 फरवरी यानी वैलेंटाइंस डे (Valentine's Day). हालांकि अब तो वैलेंटाइन वीक भी आ चुका है. जिसमें कई तरह के दिन होते हैं. लेकिन भारतीय सिनेमा और इसके मेकर्स सिनेमा में इश्क को कुछ इस तरह पिरो चुके हैं कि उसका कोई तोड़ नहीं है. फिर हमारे शायर भी इश्क के कई रूपों को समय-समय पर पेश भी कर चुके हैं. कभी दर्द, कभी इंतजार और कभी मिलन. हिंदी सिनेमा के नामचीन राइटर,डायरेक्टर और मशहूर शायर गुलजार एक ऐसा ही नाम हैं. जिनके शब्दों में इतना वजन है कि वो रूमानियत की अलग ही दुनिया में ले जाते हैं. जब वो चांद की बात करते हैं तो उसका एक अलग ही रूप हमारे सामने आ जाता है. फिर वो इश्क की गहराई में लेकर जाते हैं तो गहरे तक डुबो देते हैं.

वैलेंटाइंस डेट के मौके पर हम आपके लिए गुलजार की कुछ चुनिंदा शायरी लाए हैं, जिसके हर शब्दों में इश्क की चाशनी है तो इंतजार और विरह का दर्द भी. गुलजार की कलम का यही जादू रहा है कि अदब और नफासत. अगर वैलेंटाइन डे के मौके पर आप भी शब्द और जज्बात की कश्मकश से गुजर रहे हैं तो गुलजार के लिखे ये चुनिंदा गाने आपके जज्बात को सही आकार दे सकते हैं.

गुलजार की रोमांटिक शायरी | Gulzar Romantic Shayari 

वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
आदत इस की भी आदमी सी है

कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़
किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे

ख़ामोशी का हासिल भी इक लम्बी सी ख़ामोशी थी
उन की बात सुनी भी हम ने अपनी बात सुनाई भी

जिस की आँखों में कटी थीं सदियाँ
उस ने सदियों की जुदाई दी है

वो उम्र कम कर रहा था मेरी
मैं साल अपने बढ़ा रहा था

ज़ख़्म कहते हैं दिल का गहना है
दर्द दिल का लिबास होता है

आप के बा'द हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है

दिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है
किस की आहट सुनता हूँ वीराने में

शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है

कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की

आइना देख कर तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई

आदतन तुम ने कर दिए वादे
आदतन हम ने ए'तिबार किया

ज़िंदगी पर भी कोई ज़ोर नहीं
दिल ने हर चीज़ पराई दी है

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