1980 में हिंदी सिनेमा की एक ऐसी फिल्म रिलीज हुई थी, जिसका जादू 46 साल बाद भी बरकरार है. हम बात कर रहे हैं ऋषि कपूर, टीना मुनीम और सिमी गरेवाल स्टारर फिल्म 'कर्ज' की. रिलीज के वक्त ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई बड़ा कमाल नहीं दिखा पाई थी, लेकिन इसके गाने और म्यूजिक ने इतिहास रच दिया. समय के साथ कर्ज एक कल्ट क्लासिक बन गई और आज भी इसके गाने नई पीढ़ी के बीच उतने ही लोकप्रिय हैं. खासकर 'एक हसीना थी', 'ओम शांति ओम', 'दर्द-ए-दिल' और फिल्म का थीम म्यूजिक आज भी सुनने वालों को रोमांचित कर देता है. लेकिन इन धुनों के पीछे सिर्फ संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ही नहीं, बल्कि एक ऐसे कलाकार का भी बड़ा योगदान था, जिसका नाम आम दर्शकों के बीच बहुत ज्यादा चर्चित नहीं रहा. ये नाम था गोरख शर्मा का.
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‘एक हसीना थी' के पीछे था इस जादूगर का हाथ
फिल्म कर्ज का जिक्र होते ही सबसे पहले जिस धुन की याद आती है, वो है एक हसीना थी का शानदार गिटार पीस. गाने की शुरुआत से लेकर फिल्म के थीम म्यूजिक तक सुनाई देने वाली ये धुन आज भी म्यूजिक लवर्स को रोमांचित कर देती है. यही वो धुन थी जिसने कर्ज के संगीत को अलग पहचान दी. बहुत कम लोग जानते हैं कि इस यादगार गिटार वर्क के पीछे गिटारिस्ट गोरख शर्मा का हाथ था. उनकी उंगलियों से निकली धुन ने फिल्म के संगीत को ऐसा रंग दिया, जो चार दशक से ज्यादा समय बाद भी फीका नहीं पड़ा है.
28 दिसंबर 1946 को मुंबई में जन्मे गोरख शर्मा मशहूर संगीतज्ञ पंडित रामप्रसाद शर्मा के बेटे थे. उनके बड़े भाई प्यारेलाल बाद में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की मशहूर जोड़ी का हिस्सा बने. बचपन से ही संगीत के माहौल में पले-बढ़े गोरख ने कम उम्र में म्यूजिक नोटेशन पढ़ना और कई वाद्य यंत्र बजाना सीख लिया था. मैंडोलिन, मैंडोला, रुबाब और गिटार जैसे स्ट्रिंग इंस्ट्रूमेंट्स पर उनकी पकड़ शानदार थी.
500 फिल्मों और 1000 से ज्यादा गानों में बिखेरा जादू
गोरख शर्मा का फिल्मी सफर बेहद कम उम्र में शुरू हो गया था. 14 साल की उम्र में उन्हें संगीतकार रवि के साथ काम करने का मौका मिला. फिल्म 'चौदहवीं का चांद' में सुनाई देने वाली मैंडोलिन की धुन उन्होंने ही बजाई थी. इसके बाद उन्होंने रवि, शंकर-जयकिशन, कल्याणजी-आनंदजी और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जैसे संगीतकारों के साथ काम किया. धीरे-धीरे वे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे भरोसेमंद सेशन म्यूजिशियन्स में गिने जाने लगे.
गोरख शर्मा को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के शुरुआती बास गिटारिस्ट्स में भी गिना जाता है. करीब 50 साल लंबे करियर में उन्होंने 500 से ज्यादा फिल्मों और 1000 से अधिक गानों में योगदान दिया. कर्ज, आशिकी, डर और एक दूजे के लिए जैसी फिल्मों के संगीत में उनकी कला की झलक सुनाई देती है. 'जादू तेरी नजर', 'सांसों की जरूरत है जैसे' और 'मैं शायर तो नहीं' जैसे कई पॉपुलर गानों में भी उनकी धुनों का जादू शामिल रहा.
रिलीज के वक्त नहीं चली, लेकिन संगीत ने अमर बना दी ‘कर्ज'
सुभाष घई के निर्देशन में बनी कर्ज में ऋषि कपूर, टीना मुनीम, सिमी गरेवाल, प्रेमनाथ और प्राण जैसे कलाकार नजर आए थे. फिल्म की कहानी पुनर्जन्म और बदले के इर्द-गिर्द घूमती थी. रिलीज के समय फिल्म को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली, लेकिन इसके गाने सुपरहिट साबित हुए. धीरे-धीरे लोगों ने फिल्म को दोबारा खोजा और 'कर्ज' हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित कल्ट फिल्मों में शामिल हो गई.
गोरख शर्मा सिर्फ बेहतरीन गिटारिस्ट ही नहीं थे, बल्कि अपने दौर के सबसे सम्मानित संगीतकारों में भी गिने जाते थे. सिने म्यूजिशियंस एसोसिएशन की टॉप ग्रेड रेटिंग पाने वाले चुनिंदा कलाकारों में उनका नाम शामिल था. इस लिस्ट में पंडित शिवकुमार शर्मा और पंडित हरिप्रसाद चौरसिया जैसे दिग्गज भी थे. यही वजह है कि आज कर्ज के 46 साल पूरे होने पर उनकी बजाई धुनों को भी उतना ही याद किया जा रहा है, जितना फिल्म के सुपरहिट गानों को.
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