आज फिल्मों की पॉपुलैरिटी का अंदाजा सोशल मीडिया ट्रेंड और मर्चेंडाइज से लगाया जाता है. लेकिन 80 के दशक में एक ऐसी फिल्म आई थी.जिसके लिए लोगों की दीवानगी किसी फैन मूवमेंट से कम नहीं थी. दर्शक बार बार थिएटर पहुंच रहे थे. शो लगातार हाउसफुल चल रहे थे और बाजार में उस फिल्म के नाम वाले कपड़े तक बिकने लगे थे. टी-शर्ट, शर्ट, जैकेट, बनियान और यहां तक कि अंडरगार्मेंट्स पर भी उसी फिल्म का नाम छपने लगा था. इससे पहले शायद ही किसी फिल्म की ऐसी पॉपुलैरिटी देखी गई थी.
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'क्रांति' बनी थी लोगों का जुनून
साल 1981 में रिलीज हुई क्रांति ने रिलीज होते ही पूरे देश में तहलका मचा दिया था. मनोज कुमार की इस फिल्म में दिलीप कुमार ने चार साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी की थी. उनके अलावा मनोज कुमार, शशि कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, हेमा मालिनी, परवीन बाबी और प्रेम चोपड़ा जैसे बड़े सितारे भी फिल्म का हिस्सा थे. ये सिर्फ उस साल की सबसे बड़ी हिट नहीं बनी, बल्कि लंबे समय तक शोले के बाद भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में भी गिनी गई. फिल्म ने देशभर के 26 सेंटर में सिल्वर जुबली मनाई. मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) और जूनागढ़ (गुजरात) जैसे शहरों में भी इसने 25 हफ्तों से ज्यादा का किया. जबकि वहां किसी फिल्म का इतने लंबे समय तक टिकना बेहद मुश्किल माना जाता था. कई शहरों में फिल्म ने गोल्डन जुबली भी पूरी की.

फिल्म के नाम पर बिके कपड़े
क्रांति का क्रेज सिर्फ सिनेमाघरों तक सीमित नहीं था. फिल्म करीब 67 हफ्तों यानी डेढ़ साल तक थिएटरों में चलती रही. एक थिएटर में तो लगातार 96 दिनों तक हर शो हाउसफुल रहा. लोग टिकट के लिए लंबी लंबी कतारों में खड़े रहते थे और कई जगह एडवांस बुकिंग कई दिनों पहले ही खत्म हो जाती थी. दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में दुकानदार क्रांति नाम वाली टी-शर्ट, शर्ट, जैकेट, बनियान और यहां तक कि अंडरगार्मेंट्स भी बेचने लगे थे. किसी फिल्म के नाम पर कपड़ों का इस तरह बिकना उस दौर में बेहद अनोखी बात थी. रिलीज के 10 हफ्ते बाद भी आगरा, गोरखपुर और वाराणसी जैसे शहरों में इसकी कमाई नई रिलीज फिल्मों को चुनौती दे रही थी.
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