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बॉलीवुड का ये डायरेक्टर एक चवन्नी से बदल देता था किसी भी एक्टर की किस्मत,इसी ने राज कपूर को बनाया शोमैन

हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और निर्देशक केदार शर्मा अपने सख्त स्वभाव, शानदार फिल्मों और नए कलाकारों को पहचानने की कला के लिए मशहूर थे.

बॉलीवुड का ये डायरेक्टर एक चवन्नी से बदल देता था किसी भी एक्टर की किस्मत,इसी ने राज कपूर को बनाया शोमैन
बॉलीवुड का ये डायरेक्टर एक चवन्नी से बदल देता था किसी भी एक्टर की किस्मत

हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और निर्देशक केदार शर्मा अपने सख्त स्वभाव, शानदार फिल्मों और नए कलाकारों को पहचानने की कला के लिए मशहूर थे.उनके बारे में एक और बात फिल्म इंडस्ट्री में काफी मशहूर थी.कहा जाता था कि अगर केदार शर्मा किसी कलाकार के काम से खुश हो जाएं और उसे अपनी तरफ से दुअन्नी या चवन्नी इनाम में दे दें, तो वह कलाकार आगे चलकर बड़ा नाम बन जाता था.उनकी दी हुई वह छोटी सी चवन्नी कलाकारों के लिए किसी लकी चार्म से कम नहीं मानी जाती थी.यही वजह थी कि कई कलाकार उस चवन्नी को सालों तक संभालकर रखते थे.

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केदार शर्मा का सपना फिल्मों में काम करना

12 अप्रैल 1910 को पंजाब के नरौला में जन्मे केदार शर्मा का बचपन काफी संघर्षों में बीता.उन्हें शुरू से ही कला, कविता और फिल्मों में रुचि थी.उनके पिता चाहते थे कि वह पढ़-लिखकर शिक्षक बनें, लेकिन केदार शर्मा का सपना फिल्मों में काम करने का था.इसी सपने को पूरा करने के लिए वह घर छोड़कर कोलकाता पहुंच गए, क्योंकि उस समय फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा केंद्र वहीं था.

कोलकाता पहुंचने के बाद उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा.शुरुआत में उन्हें फिल्मों में कोई बड़ा काम नहीं मिला.बाद में उन्होंने पोस्टर पेंटर के रूप में काम शुरू किया.वह अच्छे चित्रकार थे, इसलिए यह काम उन्हें मिल गया.धीरे-धीरे उन्होंने फिल्म निर्माण के दूसरे काम भी सीख लिए.उन्होंने कैमरे पर काम किया, छोटे-मोटे रोल किए और फिर कहानी और गीत लिखने लगे.

देवदास ने दिया बड़ा मौका

साल 1936 में आई फिल्म 'देवदास' उनके जीवन का बड़ा मोड़ साबित हुई.इस फिल्म के लिए उन्होंने डायलॉग्स और गीत लिखे थे.फिल्म सुपरहिट हुई और केदार शर्मा को इंडस्ट्री में पहचान मिल गई.इसके बाद उन्होंने निर्देशन की दुनिया में कदम रखा और 'चित्रलेखा', 'नील कमल', 'बावरे नैन' और 'जोगन' जैसी कई यादगार फिल्में बनाईं.

केदार शर्मा की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह नए कलाकारों में छिपी प्रतिभा को पहचान लेते थे.उन्होंने राज कपूर को बड़ा मौका दिया.जब राज कपूर उनकी यूनिट में क्लैपर बॉय का काम करते थे, तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही लड़का आगे चलकर हिंदी सिनेमा का शोमैन बनेगा.केदार शर्मा ने अपनी फिल्म 'नील कमल' में राज कपूर को हीरो बनाया.इसी फिल्म से उन्होंने मधुबाला को भी बड़ा मौका दिया, जो उस समय सिर्फ 13 साल की थीं.

दुअन्नी या चवन्नी का सिलसिला

उन्होंने गीता बाली, भारत भूषण और संगीतकार रोशन जैसे कई कलाकारों को भी आगे बढ़ाया.अगर उन्हें किसी का काम पसंद आता, तो वह उसे इनाम में दुअन्नी या चवन्नी दिया करते थे.धीरे-धीरे इंडस्ट्री में यह बात फैल गई कि केदार शर्मा की दी हुई चवन्नी बहुत लकी होती है.कई कलाकार उसे अपने पास संभालकर रखते थे और मानते थे कि वही उनके अच्छे भविष्य की निशानी है.

फिल्मों के अलावा, उन्होंने बच्चों के सिनेमा में भी बड़ा योगदान दिया.उन्होंने भारतीय बाल फिल्म सोसायटी के लिए कई फिल्में बनाईं.उनकी फिल्म 'जलदीप' को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला.उन्हें भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए कई पुरस्कार भी मिले, जिनमें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और महाराष्ट्र सरकार का राज कपूर अवॉर्ड शामिल है.29 अप्रैल 1999 को केदार शर्मा का निधन हो गया.जिस राज कपूर अवॉर्ड से उन्हें सम्मानित किया जाना था, उसके मिलने से ठीक एक दिन पहले उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया.
 

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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