8 अप्रैल 1983 को रिलीज हुई फिल्म अंधा कानून आज भी बॉलीवुड की उन क्लासिक एक्शन फिल्मों में शुमार है, जिसमें कानून की अंधापन और बदले की आग को तीखे अंदाज में दिखाया गया. टी. रामाराव द्वारा निर्देशित यह फिल्म तमिल फिल्म 'सत्तम ओरु इरुट्टराई' की हिंदी रीमेक थी. मूल रूप से रजनीकांत को मुख्य नायक विजय कुमार सिंह के रोल में कास्ट किया गया था, जबकि अमिताभ बच्चन का किरदार जान निसार खान सिर्फ एक कैमियोथा. लेकिन फिल्म के हिंदी वर्जन में अमिताभ बच्चन की भूमिका को काफी बढ़ा दिया गया.
अमिताभ बच्चन बने असली हीरो
महानायक की जबरदस्त पॉपुलैरिटी और पावरफुल डायलॉग डिलीवरी के कारण उनका रोल दर्शकों के बीच इतना चर्चित हो गया कि अंधा कानून को आज भी कई लोग अमिताभ बच्चन की फिल्म के रूप में याद करते हैं, न कि रजनीकांत की. सिर्फ पांच दिन की शूटिंग के बावजूद अमिताभ ने स्क्रीन पर ऐसा जादू बिखेरा कि अंधा कानून के असली हीरो बन गए. उनकी अदाकारी, खासकर कोर्ट रूम सीन और 'ये अंधा कानून है' जैसे गाने ने फिल्म को नई ऊंचाई दी.
फिल्म की कहानी
अंधा कानून की कहानी दो भाई-बहन के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने परिवार की हत्या का बदला लेना चाहते हैं. रजनीकांत ने विजय का रोल निभाया, जबकि हेमा मालिनी इंस्पेक्टर दुर्गा देवी सिंह बनीं और रीना रॉय ने बहन का किरदार संभाला. अमिताभ बच्चन ने गलत तरीके से जेल गए वन अधिकारी का रोल किया, जो बदले की राह पर चलता है. फिल्म में प्रेम चोपड़ा, डैनी डेंजोंगपा, अमरीश पुरी, प्राण और माधवी जैसे कलाकारों ने भी अहम भूमिका निभाई.
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जीतेंद्र को ऑफर हुई फिल्म
रोचक बात यह है कि फिल्म शुरू में जीतेंद्र और परवीन बाबी को ऑफर की गई थी. जीतेंद्र ने बहुत ज्यादा फीस मांग ली, जिसके कारण वे बाहर हो गए. परवीन बाबी ने भी रजनीकांत के साथ काम करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद रीना रॉय को शामिल किया गया. अमिताभ बच्चन ने रजनीकांत को बॉलीवुड में डेब्यू दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी. उन्होंने प्रोड्यूसर्स को आश्वासन दिया कि अगर रजनीकांत को मुख्य रोल दिया गया तो वे खुद कैमियो करेंगे.
अंधा कानून की कहानी
अंधा कानून का बजट लगभग 2.30 करोड़ रुपये था, जबकि इसने भारत में करीब 5 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया और वर्ल्डवाइड लगभग 7.5 करोड़ रुपये कमाए. 1983 की पांचवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनकर यह सुपरहिट साबित हुई. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का संगीत और फिल्म की थीम कानून जब अंधा हो जाए तो बदला ही इंसाफ है आज भी प्रासंगिक लगती है. यह फिल्म रजनीकांत के लिए बॉलीवुड डेब्यू और अमिताभ बच्चन के करियर में एक यादगार कैमियो के रूप में जानी जाती है.
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