पुराने हिंदी गानों की खासियत ही यही है कि वक्त बदल जाता है, लेकिन उनके बोल और धुन दिल में बसे रहते हैं. ऐसा ही एक गीत है ‘अभी ना जाओ छोड़कर', जिसे आज भी प्रेमी अपनी प्रेमिका से थोड़ा और रुकने की गुजारिश करने के लिए गुनगुनाते हैं. 1961 में आई फिल्म ‘हम दोनों' का यह गाना मोहम्मद रफी और आशा भोसले की आवाज में रिकॉर्ड हुआ था. देव आनंद और साधना पर फिल्माया गया यह गीत आज भी सोशल मीडिया पर सुनाई देता है. दिलचस्प बात यह है कि जिस गाने को लोग इतना पसंद करते हैं, उसे लेकर आशा भोसले खुद पूरी तरह संतुष्ट नहीं थीं.
देव आनंद-साधना की जोड़ी ने पर्दे पर रचा था प्यार का जादू
‘अभी ना जाओ छोड़कर' फिल्म ‘हम दोनों' का हिस्सा था, जिसमें देव आनंद और साधना ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं. फिल्म के इस गीत में प्रेमी अपनी प्रेमिका से कहता है कि अभी जाने का वक्त नहीं आया है. वह चाहता है कि दोनों कुछ देर और साथ रहें, क्योंकि दिल अभी भरा नहीं है.
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यही भाव इस गाने को खास बनाता है. इसमें न तो बहुत बड़े-बड़े वादे हैं और न ही प्यार का दिखावा. बस साथ बिताए जा रहे कुछ पलों को रोक लेने की एक मासूम-सी इच्छा है. शायद यही वजह है कि इतने साल बाद भी यह गीत सुनने वालों को अपने करीब लगता है.
आशा भोसले को पसंद नहीं आया था अपना अंदाज
इस गाने को मोहम्मद रफी और आशा भोसले ने अपनी आवाज दी थी. दोनों की आवाज का मेल गीत को बेहद मधुर बनाता है. रफी की नरम आवाज और आशा भोसले के सुरों ने मिलकर प्रेम के इस संवाद को यादगार बना दिया. हालांकि, IMDb के मुताबिक, आशा भोसले अपने गाने के अंदाज से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थीं. लेकिन समय के साथ यही गीत उनके सबसे चर्चित रोमांटिक गानों में शामिल हो गया. यह भी इस बात का उदाहरण है कि किसी गीत की लोकप्रियता सिर्फ उसे गाने वाले की पसंद पर निर्भर नहीं करती, बल्कि श्रोताओं का प्यार उसे अलग पहचान दे सकता है.
साहिर के बोल और जयदेव की धुन ने बना दिया अमर गीत
‘अभी ना जाओ छोड़कर' के बोल मशहूर गीतकार साहिर लुधियानवी ने लिखे थे. कहा जाता है कि इस गीत की प्रेरणा हफीज जालंधरी की कविता ‘अभी तो मैं जवान हूं' से मिली थी. कविता के भाव और लय से प्रेरित होकर तैयार किया गया यह गीत बाद में हिंदी सिनेमा के सबसे पसंदीदा रोमांटिक गानों में शामिल हो गया.
इसकी धुन संगीतकार जयदेव ने तैयार की थी. गीत के बोल, संगीत और आवाजों का मेल इतना सहज है कि इसे सुनते हुए लगता है जैसे कोई अपने दिल की बात सीधे कह रहा हो. यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है. आज भी जब कोई प्रेमी अपनी प्रेमिका से कहता है, “अभी मत जाओ, कुछ देर और ठहरो,” तो इस गीत की याद आ जाती है. यही वजह है कि 65 साल बाद भी ‘अभी ना जाओ छोड़कर' पुराने गानों की दुनिया में अपनी खास जगह बनाए हुए है.
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