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डायरेक्टर ने कहा 'बुड्ढे को बनाऊंगा हीरो', 57 की उम्र में दादामुनि ने रेलगाड़ी पर गाया ऐसा गाना, फिल्म हुई हिट, गाना एवरग्रीन

हृषिकेश मुखर्जी ने दादामुनी से कहा था कि मैं बुड्ढे को हीरो बनाऊंगा. उन्होंने कर दिखाया. 58 साल पुरानी फिल्म में 57 साल के दादामुनी ने 'रेलगाड़ी रेलगाड़ी छुक छुक छुक' ऐसा गाया कि ये गाना भी हिंदी क्लासिक सॉन्ग में गिना जाता है.

डायरेक्टर ने कहा 'बुड्ढे को बनाऊंगा हीरो', 57 की उम्र में दादामुनि ने रेलगाड़ी पर गाया ऐसा गाना, फिल्म हुई हिट, गाना एवरग्रीन
रेलगाड़ी पर बना अशोक कुमार का मशहूर गाना
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1968 में हिंदी सिनेमा ने एक अनोखी कहानी देखी. जब उम्र को हीरो बनाने की शर्त माना जाता था, तब हृषिकेश मुखर्जी ने एक साहसिक फैसला लिया. उन्होंने अशोक कुमार यानी दादामुनि को फिल्म ‘आशीर्वाद' का हीरो बनाया. उस समय दादामुनि करीब 57 साल के थे और लंबे समय से कैरेक्टर एक्टर के रोल में नजर आ रहे थे. हृषिकेश मुखर्जी ने खुद बताया था कि अशोक कुमार हमेशा मजाक में कहते थे कि आपने मेरे साथ कई फिल्में कैरेक्टर एक्टर के रूप में बनाई, लेकिन हीरो के रूप में कभी नहीं. एक दिन हृषिकेश मुखर्जी ने अशोक कुमार से फोन पर कहा कि अगर तुम मुझे चिढ़ाना बंद नहीं करोगे तो मैं बुड्ढे को हीरो बना दूंगा.' अशोक कुमार ने इसे मजाक समझकर हंसा. लेकिन जब ‘आशीर्वाद' की कहानी हाथ आई तो हृषिकेश मुखर्जी ने दादामुनि से कहा, अब समय आ गया है कि बुड्डा हीरो बने. इसी तरह फिल्म का जन्म हुआ.

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अशोक कुमार ने 57 की उम्र में मचाया धमाल
'आशीर्वाद' की कहानी एक आदर्शवादी व्यक्ति शिवनाथ ‘जोगी ठाकुर' चौधरी की है. अशोक कुमार ने इस भूमिका को बेहद संवेदनशीलता और गहराई से निभाया. फिल्म में उनकी पत्नी लीला का किरदार वीना ने किया. बेटी नीना की भूमिका सुमिता सान्याल ने निभाई, जबकि डॉक्टर बिरेन के रूप में संजीव कुमार नजर आए. अन्य कलाकारों में सज्जन, हरिंद्रनाथ चट्टोपाध्याय, पद्मा खन्ना और छोटी उम्र में सारिका भी शामिल थे. कहानी जरूरतमंदों के प्रति सहानुभूति, परिवारिक टूट, जेल की जिंदगी और पिता-पुत्री के रिश्ते पर केंद्रित है. हृषिकेश मुखर्जी ने खुद निर्माता और निर्देशक के रूप में काम किया. संगीत वसंत देसाई का था और संवाद गुलजार के.

इस गाने की कुछ मजेदार लाइनें हैं:

रेल गाड़ी, रेल गाड़ी
छुक छुक छुक छुक...
बीच वाले स्टेशन बोले
रुक रुक रुक रुक...
तड़क-भड़क, लोहे की सड़क
धड़क-धड़क, लोहे की सड़क
यहां से वहां, वहां से यहां
यहां से वहां, वहां से वहां
छुक छुक छुक छुक छुक

'रेल गाड़ी रेल गाड़ी छुक छुक छुक' सॉन्ग
फिल्म का सबसे यादगार और एवरग्रीन हिस्सा है गाना 'रेल गाड़ी छुक-छुक'. इस गाने को अशोक कुमार ने खुद गाया है. बच्चे पार्क में खेलते हुए रेलगाड़ी का खेल खेलते हैं और दादामुनि उन्हें ‘आओ बच्चों, खेल दिखाएं, छुक-छुक करती रेल चलाएं' सुनाते हैं. गाने के बोल हरिंद्रनाथ चट्टोपाध्याय के हैं. यह गाना भारतीय सिनेमा के शुरुआती रैप-स्टाइल गीतों में गिना जाता है. 57 साल की उम्र में दादामुनि की आवाज में बच्चों वाला यह मासूम और मजेदार गाना आज भी सुनने वालों के चेहरे पर मुस्कराहट ला देता है. 

बेस्ट हिंदी फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड
‘आशीर्वाद' बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और आलोचकों की भी पसंद बनी. इसे 16वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बेस्ट हिंदी फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला. अशोक कुमार को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार और फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवॉर्ड भी मिला. हृषिकेश मुखर्जी की फिल्मों की खासियत थी कि वे बड़े बजट और स्टारड्म के बजाय कहानी, भावनाओं और मिडिल-क्लास जीवन पर जोर देते थे. ‘आशीर्वाद' भी उसी परंपरा का हिस्सा है.

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