90 के दशक में जिन गानों के बिना शादी-ब्याह की रौनक अधूरी लगती थी, उनमें ‘काली तेरी चोटी है, परांदा तेरा लाल नी' का नाम जरूर लिया जाता है. पंजाबी लोकगीतों के रंग और मस्ती से सजे इस गाने पर आज भी लोग थिरकने लगते हैं. साल 1990 में आई फिल्म ‘बहार आने तक' का यह गीत उस दौर में खूब लोकप्रिय हुआ था. खास बात यह है कि इसमें नजर आईं अभिनेत्री रूपा गांगुली को दर्शकों ने बाद में बीआर चोपड़ा के टीवी सीरियल ‘महाभारत' में द्रौपदी के किरदार में भी खूब पसंद किया. अनुराधा पौडवाल और मंगल सिंह की आवाज में सजे इस गाने का जादू आज भी कायम है.
पंजाबी अंदाज और संगीत ने बनाया गाने को खास
‘काली तेरी चोटी है, परांदा तेरा लाल नी' के बोल सुनते ही पंजाबी संस्कृति की झलक मिलती है. इसमें चोटी में बंधे लाल परांदे का जिक्र है, जो पंजाबी महिलाओं के पारंपरिक पहनावे और साज-सज्जा का अहम हिस्सा रहा है. गाने के बोल इंदीवर ने लिखे थे, जबकि इसका संगीत राजेश रोशन ने तैयार किया था. अनुराधा पौडवाल और मंगल सिंह की आवाज ने इसे ऐसा अंदाज दिया कि यह गाना लोगों की जुबान पर चढ़ गया. इसकी धुन, मस्ती और छेड़छाड़ भरे बोल इसे दूसरे रोमांटिक गानों से अलग बनाते हैं.
द्रौपदी बनकर घर-घर मशहूर हुई थीं रूपा गांगुली
इस गाने में अभिनेत्री रूपा गांगुली नजर आई थीं. 1988 से 1990 के बीच प्रसारित बीआर चोपड़ा के ‘महाभारत' में द्रौपदी का किरदार निभाकर उन्होंने देशभर में पहचान बनाई. पर्दे पर द्रौपदी के रूप में उनके अभिनय को आज भी याद किया जाता है. लेकिन बहुत से दर्शकों के लिए उन्हें इस पुराने गाने में देखना एक दिलचस्प अनुभव है. ‘बहार आने तक' में उन्होंने रमा का किरदार निभाया था. फिल्म में सुमीत सहगल, मून मून सेन, तारिक शाह और नवीन निश्चल जैसे कलाकार भी थे. इस तरह रूपा गांगुली के करियर का यह दौर टीवी और फिल्मों, दोनों से जुड़ा रहा.
फिल्म से ज्यादा यादगार बन गए इसके गाने
तारिक शाह के निर्देशन में बनी ‘बहार आने तक' 1990 में रिलीज हुई थी. फिल्म की कहानी दो दोस्तों और उनके अतीत से जुड़ी घटनाओं के इर्द-गिर्द घूमती है. हालांकि, आज इस फिल्म का जिक्र होता है तो इसके संगीत को भी खास तौर पर याद किया जाता है. ‘काली तेरी चोटी है' के अलावा फिल्म के दूसरे गाने भी उस दौर में लोकप्रिय हुए थे. करीब 36 साल बाद भी ‘काली तेरी चोटी है' की लोकप्रियता इस बात का उदाहरण है कि सादगी भरे बोल, याद रह जाने वाली धुन और लोक-संगीत का रंग किसी गाने को लंबे समय तक लोगों के बीच जिंदा रख सकते हैं.
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