कैसे होता है कौंवों का अंतिम संस्कार? जानें क्यों 'मौत' के बाद 'लाश' को घेरकर बैठ जाते हैं, चौंका देगी वजह

किसी इंसान की मौत के बाद आपने उसके परिवार वालों को दुख-शौक मनाते देखा होगा, लेकिन क्या आप को पता है कि, इंसानों की तरह पशु-पक्षियों में भी किसी अपने की मौत के बाद मातम मनाने का अलग तरीका होता है. हैरानी की बात तो ये है कि, वो दुख जताने के साथ ही मौत के कारण का भी पता लगाते हैं.

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क्या आप जानते हैं कौवे भी करते हैं मर्डर मिस्ट्री की जांच, वैज्ञानिक शोध में हुआ खुलासा
Photo-vigyansaral

Crows Funeral Ritual: प्रकृति अपने अंदर कई रहस्य समेटे हुए है. जब कभी ये राज खुलते हैं, तो हैरानी के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर कर देते हैं. एक ऐसा ही राज सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो के जरिए लोगों को हैरान कर रहा है. आपको पता ही होगा कि, इंसानों की तरह ही जीव-जंतु भी अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं, लेकिन इनमें भी कौंवों का व्यवहार थोड़ा अनोखा और प्रभावशाली होता है. जैसे जब कोई कौवा मर जाता है, तो उसके साथी उसके अगल-बगल इकट्ठा हो जाते हैं और तेज-तेज कांव-कांव की आवाज निकालते हैं. कहते हैं कि कई बार ये शोर नहीं, बल्कि उनका दुख व्यक्त करने का तरीका होता है.

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कौवों का अंतिम संस्कार (Crow Mourning Behavior)

कई बार देखा जाता है कि, एक कौवे के मरने पर तुरंत दूसरा कौवा तेज-तेज आवाजें निकालकर अन्य साथी कौवों को बुलाने की कोशिश करता है और उसकी आवाज सुनकर मिनटों में ही दर्जनों कौवे इकट्ठा हो जाते हैं. जानकारों के मुताबिक, कौवे अपने साथी की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए बाकायदा एक फ्यूनरल गैदरिंग (funeral gathering) करते हैं, जिसमें दर्जनों कौवे अपने मृत साथी के शरीर को घेर कर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं. इसे crow wake भी कहा जाता है.

अपने साथी की मौत पर निकालते हैं गमगीन आवाज (Social intelligence in birds)

कहते हैं कि, कौवे बेहद जिज्ञासु और बुद्धिमान पक्षी होते हैं. वे अपने साथी मृत कौवे के शरीर को चोंच से छूकर मौत का कारण क्या हो सकता है, ये पता लगाते हैं. जैसे कोई घाव या फिर बीमारी का कारण समझते हैं, ताकि स्थिति के लिए बाकी साथी संभल सकें. अगर वहां किसी शिकारी बिल्ली या कुत्ते का खतरा हो, तो ये कौवे अपने पूरे समूह को अलर्ट कर देते हैं. यही नहीं वे उस जगह को इस तरह याद करते हैं, ताकि भविष्य में खतरा न हो. यह व्यवहार पूरे समूह की सुरक्षा के लिए होता है.

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इंसानों जैसी समझ रखने वाले कौवे (Crow Intelligence and Social Behavior)

अमेरिका के वाशिंगटन विश्वविद्यालय के शोधकर्ता जॉन मार्जलुफ ने बरसों तक इन पक्षियों का अध्ययन किया है. उनके शोध में सामने आया कि कौवों का दिमाग उनके शरीर के हिसाब से काफी बड़ा और तेज होता है. जानकारों के मुताबिक, कौवे मृत साथी से सीखते हैं और खतरे को याद रखते हैं. यही उनकी समझदारी का सबसे बड़ा प्रमाण है.

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(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)
 

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Funeral Rituals
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